विश्व में क्षमा से बढ़कर कुछ नहीं है भावसागर महाराज
बांसवाड़ा
पूज्य मुनि श्री भावसागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व में क्षमता से बढ़कर अन्य कुछ नहीं है क्षमा और उदारता वही सच्ची जहां स्वार्थ का वास न हो।
उन्होंने क्षमा के विषय में कहा कि क्षमा से व्यक्ति फूल सा हल्का सा हो जाता है। इसका विपरीत तत्व है क्रोध क्रोध की दोहरी तलवार मान के स्थान पर रहती है। क्षमा उनसे मांगे जिनसे हमारी बनती नहीं है। क्षमा ना करने से व्यक्ति तनाव ग्रस्त रहता है। क्षमा को वंदनीय कहते हुए महाराज श्री ने कहा कि क्षमा जिंदगी है, क्षमा साधना, क्षमा प्रार्थना आदि है।



भारत देश की विशेष व्याख्या करते हुए कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां हमेशा युद्ध मजबूरी में लड़ा जाता है शौक से नहीं। क्रोध से मनुष्य की ग्रंथियां से विषाक्त द्रव्यों का स्राव होने लगता है। जो पूरे शरीर में फैलने लगता है। क्रोध से अनेक बीमारियां होती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
