मान-अपमान – सुख-दुःख में समताधारी – महापुरुष कहलाता है- मुनि संघ ने पद्म पुराण ग्रंथ के स्वाध्याय में बताया
आगरा
आगरा में निर्मल सेवा सदन छीपीटोला, आगरा में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम् प्रिय शिष्य परम पूज्य मुनि श्री के श्रीमुख से श्री राम कथा पदम पुराण जैन रामायण वाचना में मुनि श्री ने अपनी मंगलमय वाणी में बताया कि मान-अपमान – सुख-दुःख में समताधारी – महापुरुष कहलाता है- इसके विपरित विपत्ति में क्रोध और अपमान का धारण करना अधम पुरुष की श्रेणी में आता हैं l तब ब्राह्मण ने राम सीता लक्ष्मण के वचन कहे तो लक्ष्मण को क्रोध आ गया और उसे दंड देने हेतु उपर ऊधर में उठा लिया परन्तु परन्तु श्री राम ने लक्ष्मण को समझाते हुये शान्त किया और ब्राह्मण को छोड़ने का निर्देश दिया। तथा वह ब्राह्मण को धन्यवाद देकर उसके घर से निकल गाँव में आ गये l ग्राम वासियों ने उनका सत्कार भोज से सम्मान किया। और वे भोजन कर वन और की और गमन कर गये l एक वट वृक्ष के नीचे आकर सो गये l
नामक यथ (व्यन्तर) उप वर इवकरण वृक्ष पर बैठा था उसने उन्हें देखा और अपने स्वामी से शिकायत की कि उन्होंने मेरे घर पर कब्जा कर लिया है। लेकिन उनका तेज इतना है कि में उन्हें वहाँ से हरा नही पा रहा हूँ इवकरण के स्वामी यक्ष ने अपने अवधिज्ञान से जाना कि ये तो साक्षात नारायण और बलभद्र है। तब उन यक्षराज से अपनी विक्रिया से वहाँ सुन्दर महल की रचना कर दी और उन्हें पुष्प वेष्टित आराम ये झोने की व्यवस्था की l तब उन्होंने चिन्तन किया कि यह किसी देवकृत रचना है और उन्होंने हम पर यह उपकार किया है। वह कुछ समय तब तक वहाँ वर्षाकाल आ गया और वह चातुर्मास व्यतित करने हेतु वही रुक गये l तब ही यह ब्राह्मण लकड़ीयाँ लेने उस जंगल में आया । और वह सुदर भवन देखकर विस्मित हो गया और घर लोटे कर सारा वृतान्त ब्राह्मणी को सुनाया। राम की कृपा से प्राप्त वैभव का पाकर और मुनिराज से प्राप्त सम्यगदर्शन का पाकर उसे वैराग्य हो गया और मुनिराज की शरण में हो गया । जाकर शिक्षित दिगम्बर संत वात-रसायन होते हैं। उधर चातुर्मास काल पूर्ण होने पर श्री राम भी वहा से चलने लगे और यहाँ के यक्ष दक्षिणी में को धन्यवाद देते हुये आगे बढ़ गये और कई दिनों की यात्रा के बाद एक घने वन में गमन करते हुये एक सुन्दर नगर के पास पहुँच गये। उस नगर के राजा की एक पुत्री वन माला थी जो कि लक्ष्मण से ही विवाह करने का निश्चय कर चुकी थी l वन में लक्ष्मण – वन माला का मिलन हुआ और उनका विवाह हो गया l
इस मौके पर मंदिर कमेटी अध्यक्ष अनिल जैन कांटा, मंत्री प्रवेश जैन, रविंद्र जैन (कोषाध्यक्ष), प्रदीप जैन सी.ए,राजेश जैन, विवेक जैन, आशु जैन (बाबा), रोहित जैन, दिनेश जैन, राजीव जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन आदि थे l
मीडिया प्रभारी राहुल जैन से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया
