सोलहकारण भावना के चिंतवन से ही तीर्थंकर प्रकृति का बंध होता है दृढ़मति माताजी

धर्म

सोलहकारण भावना के चिंतवन से ही तीर्थंकर प्रकृति का बंध होता है दृढ़मति माताजी
गौरझामर
आर्यिका 105 दृढ़मति माताजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि 16 कारण भावना के चिंतवन से ही तीर्थंकर प्रकृति का बंध होता है। इसका भावार्थ समझते हुए कहा कि जितने भी तीर्थंकर हुए हैं उन्होंने इसमें 16 कल्याणकारी भावनाओं का चिंतवन किया है।

 

 

 

 

उन्होंने भादव का महीना पवित्र क्यों कहा जाता है इस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महीना इसलिए पवित्र माना जाता है क्योंकि इस माह की शुरुआत 16 कारण व्रत से प्रारंभ होती है। और महीने का अंत 10 लक्षण धर्म के समापन के साथ होता है। दीपक भाई चौधरी ने दी जानकारी के अनुसार ज्येष्ठ आर्यिका माताजी श्री के कुशल मार्गदर्शन में 10 लक्षण महापर्व के 10 दिन तक श्रावक संस्कार शिविर चलेगा

 

 

जिसमें सभी धर्म प्रेमी 10 दिन तक धर्म आराधना करेंगे। रविवार की बेला में बालिका मंडल की बहनों ने सुंदर अस्तित्व के थाल सजाएं और सभी समाज बंधुओ ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का भव्य पूजन किया दूर दराज के भक्तों ने आकर पूज्य माताजी संघ का आशीर्वाद लिया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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