उपादान की योग्यता ही कार्य सम्पादित कराती है लेकिन निमित्व का सदभाव भी आवश्यक हैं l साक्ष्य सागर जी महाराज

धर्म

उपादान की योग्यता ही कार्य सम्पादित कराती है लेकिन निमित्व का सदभाव भी आवश्यक हैं l साक्ष्य सागर जी महाराज
आगरा

निर्मल सेवा सदन छीपीटोला, आगरा में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम् प्रिय शिष्य परम पूज्य मुनि श्री 108 साक्ष्य सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 योग्य सागर जी महाराज,मुनि श्री 108 निवृत सागर जी महाराज जी के सानिध्य में आगरा के इतिहास में पहली बार सिद्ध पुरुष श्री राम कथा पदम पुराण जैन रामायण वाचना हुई दीप प्रज्जवलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट आदि मंगलाचरण हुआ। इसके बाद मुनि श्री 108 साक्ष्य सागर जी महाराज जी ने पद्‌म पुराण को कथा के अन्तर्गत अपनी मंगलमय वाणी में बताया कि माँ जिनवाणी में यह जीव अकेला आता है, अकेला ही भोगता है संसार में प्रत्येक जीव अपना-अपना कार्य अकेले ही करता है। उपादान की योग्यता ही कार्य सम्पादित कराती है लेकिन निमित्व का सदभाव भी आवश्यक हैं l

 

 

उन्होंने रामायण के विषय मे बताया की एक समय राजा दशरथ बहुत विषम परिस्थिति मे है l कुछ निर्णय नही कर पा रहे। उधर जब भरत ने अपने राजतिलक के बारे में सुना तो वह भी वैराग्य लेने को उद्यत हो गए ओर राजपाट लेने से इन्कार कर दिया l

 

इस अवसर परम मुनि श्री 108 योग्य सागर जी महाराज जी ने अपनी वाणी से कहा पुण्य आत्मा कौन? जिनका जन्म गुरूओं की सेवा में और समता भाव में लगता है वही पुण्य आत्मा है l कोटि कोटि दान किये, परन्तु मन में गुरुओं को आहार दान देने के भाव नहीं आये, अतः वह द्रव्य दान व्यर्थ हैं l


यह रहे मोजूद

धर्म सभा में मंदिर कमेटी अध्यक्ष अनिल जैन कांटा, मंत्री प्रवेश जैन, रविंद्र जैन (कोषाध्यक्ष), प्रदीप जैन सी.ए,राजेश जैन, विवेक जैन, आशु जैन (बाबा), रोहित जैन, दिनेश जैन, राजीव जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन आदि थे l

मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया आगरा के इतिहास में पहली बार सिद्ध पुरुष श्री राम कथा पदम पुराण जैन रामायण वाचना हुई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *