निस्वार्थ भाव सेवा से मिलेगा मेवा आर्यिका विज्ञा श्री
निवाई
श्री शांतिनाथ दिगंबर अग्रवाल जैन मंदिर में प्रातः अभिषेक, शांति धारा , बाद अष्टद्रव्यों से पूजा हुई। जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत करवाया की कार्यक्रम के अंतर्गत आर्यिका श्री ने भरी धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वार्थ भावना से की गई सेवा तो व्यवसाय का रूप हो सकता है,किन्तु नि: स्वार्थ भावना से की गई सेवा वास्तव में धर्म कहलाता है, अंतरंग में करुणा रहम का परिणाम हुए भी बिना कोई भी व्यक्ति नि. स्वार्थ भावना से नहीं कर सकता। सेवा, जिसका जुनून है वह ही वास्तव में मेवा प्राप्त करने का अधिकारी है।जिस प्रकार जिस पुष्प में गंध नही वे पुष्प व्यर्थ है ,यदि शरीर मैं प्राण नहीं होते तो वह शरीर व्यर्थ है ,सेवा धर्म का प्रारंभिक सोपान है। तथा सेवा ही धर्म का अंतिम स्वपन है। हनुमान जी ने रामचंद्र की सेवा की इसलिए आज भगवान राम के भक्त भले ही कम मिलेंगे हनुमान के भक्त ज्यादा मिलेंगे, सेवा करने से भक्त हनुमान भगवान बन गये। सेवा करने वाला व्यक्ति कभी सामान्य नहीं होता महान होता है।
गोधा ने अवगत कराया कि आगामी 31 अगस्त से 9 सितंबर तक तप ,त्याग ,संयम का पर्व पर्युषण पर्व में श्रावक संस्कार साधना शिविर का आयोजन किया जा रहा है और 31 अगस्त को श्रीजिनसहस्त्रनाम महामंडल का विधान का विश्व शांति महायज्ञ के साथ समापन होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
