गोली का घाव तो भर सकता है, पर बोली का भाव नहीं भर सकता निर्लोभ सागर महाराज
सागर
भाग्योदय तीर्थ परिसर में बोलते हुए पूज्य मुनि श्री 108 निर्लोभ सागर महाराज ने अपने उद्बोधन से ज्ञान के विषय में प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि कुछ लोग ऐसे हैं जो फुटपाथ पर भी अच्छी नींद ले लेते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें डनलप के गद्दे पर भी नींद नहीं आती है। उन्होंने कहा की ज्ञान की बातें जहां भी हो रही हो उसे हमेशा ध्यान से ज्ञान को हमेशा महत्व देना चाहिए। उन्होंने ध्यान इंगित करते हुए कहा कि साधु की संगति में ज्ञान जल्द प्राप्त हो जाता है। अपराधी को अपराधी नहीं रोगी समझना चाहिए।
ऋषि मुनियों की बात करते हुए महाराज श्री ने कहा कि ऋषि मुनियों ने सुख शांति पाने के लिए पांच सूत्र दिए हैं जिसमें कभी भी किसी का दिल दुखाने की बात मत करो, क्योंकि गोली का घाव तो भर सकता है, पर बोली का भाव नहीं भर सकता। उन्होंने कहा कि महाभारत एक छोटे से वाक्य पर हो गया था। मौन रहने को सोने का आभूषण बताते हुए कहा कि अगर बोलना सोना है तो मौन रहना सोने से बना आभूषण है। हम सोने से बने आभूषण नहीं पहनते हैं। वचनों के द्वारा भी हिंसा होती है। शब्दों की पीड़ा अत्यधिक होती है। जहां शब्दों से सम्मान भी होता है, नहीं शब्दों से अपमान भी होता है। आपकी जीभ बोलकर भीतर चली जाती है, लेकिन भोगना सर को पड़ता है। अधिक योग्य बने, बड़ों की बराबरी मत करो दूसरों की देखा देखी भी मत करो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
