अन्तर्मना उवाच* (15 मार्च!)ऐसे लोग भी तुम्हारे आस पास मिलेंगे..जिनके दिलों में जहर और जुबान में मिठास भरी है..!

धर्म

अन्तर्मना उवाच* (15 मार्च!)ऐसे लोग भी तुम्हारे आस पास मिलेंगे..जिनके दिलों में जहर और जुबान में मिठास भरी है..!

ऐसे लोग भी तुम्हारे आस पास मिलेंगे..
*जिनके दिलों में जहर और जुबान में मिठास भरी है..!

*सच है मित्रो! चिकनी, चुपड़ी बातों से, फितरत का पता नहीं चलता*। अन्दर क्या है, बाहर क्या है, इसका पता नही चलता। *जो मीठेपन का लेप चढ़ाकर, प्यारी बातें करते हैं, वो गिरगिट की भान्ति कब रंग-ढ़ंग बदल दे, इसका पता नहीं चलता है।*

 

 

आपने भी सुना होगा — कहीं जंगल कट रहा था, लेकिन सारे पेड़ कुल्हाड़ी को बोट दे रहे थे। क्योंकि पेड़ सोच रहे थे, कि कुल्हाड़ी में जो लकड़ी लगी है, वो उनके ही समाज की है। *अपने ही दु:ख देते हैं। अपनों से अपनापन उतना रखो, यदि कभी अपने छोड़ भी दे, तो जीते जी मरना ना पड़े। अन्यथा* ——–।

इसलिए दुनिया में जितने भी महापुरुष हुए हैं, वे केवल पूजने के लिए नहीं है, प्रेरणा लेने के लिए भी है। *

 

 

 

आज हम तीर्थंकरों और अवतारों की पूजा तो करते हैं, मगर उनके आदर्श जीवन से प्रेरणा नहीं लेते।* उनकी जय तो बोलते हैं, मगर उन्हें जीते नहीं। उनकी प्रशंसा तो करते हैं, मगर उन्हें पसंद नहीं करते। *अब प्रशंसा करने का नहीं, अब समय है उनके तप,‌ त्याग और आचरण को पसंद करने का…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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