दीक्षार्थी शकुंतला जैन की गोद भराई के साथ निकाली गई शोभा यात्रा

धर्म

दीक्षार्थी शकुंतला जैन की गोद भराई के साथ निकाली गई शोभा यात्रा
रामगंजमंडी
दीक्षार्थी शकुंतला जैन की सोमवार की संध्या बेला में शोभायात्रा निकाली गई एवं गोद भराई की गई। यह शोभा यात्रा काला निवास राजस्थान मील से प्रारंभ हुई जो नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंची।

 

यह 25 अप्रैल को आचार्य श्री 108 इंद्रनंद जी महाराज एवं निपुण नंदी जी महाराज से डिग्गी मालपुरा में दीक्षा ग्रहण करेंगी।

जिस भी मार्ग से यह शोभायात्रा गुजरी जगह-जगह दीक्षार्थी की गोद भराई कर उनका स्वागत किया गया। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने पर उन्होंने मूलनायक शांतिनाथ भगवान के दर्शन किए।

 

 

 

     

 

उसके उपरांत सम्मान सभा का आयोजन किया गया। जिसमें सर्वप्रथम दीक्षार्थी के परिवार जनों का अभिनंदन किया गया। उसके उपरांत सर्वप्रथम नगर गौरव ब्रह्मचारिणी रीना दीदी द्वारा दीक्षार्थी दीदी की गोद भराई की गई। इसके उपरांत श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन महिला मंडल द्वारा दीक्षार्थी दीदी की गोद भराई कर उनका अभिनंदन किया गया। दीक्षार्थी के परिवार जनों का सम्मान समाज की और से अध्यक्ष दिलीप कुमार विनायका, उपाध्यक्ष चेतन कुमार बागड़ीया, महामंत्री राजकुमार गंगवाल, नरेश कुमार बाकलीवाल, केवलचंद लुहाड़िया आदि के द्वारा किया गया। समारोह का संचालन राजकुमार गंगवाल ने किया एवं उन्होंने दीक्षार्थी के जीवन पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रशांत जैन शास्त्री द्वारा दीक्षा का महत्व समझाया गया। 

 

 

एक परिचय दीक्षार्थी शकुंतला जैन काला
शकुंतला देवी का जन्म सन 1955 में श्री मोतीलाल जैन एवं माता श्री शांति देवी चांदवाड की बगिया में चौथ का बरवाड़ा राजस्थान में हुआ। इन्होंने दसवीं कक्षा तक शिक्षा ग्रहण की एवं इनका विवाह ताराचंद जैन सवाई माधोपुर वालों के सुपुत्र श्री कैलाश जी जैन से हुआ। इनका पूरा परिवार धार्मिक संस्कारों से परिपूर्ण रहा। इनका जीवन धार्मिक संस्कारों से परिपूर्ण रहा और लगभग 25 वर्ष पूर्व सिद्ध चक्र महामंडल विधान का आयोजन कराया,इसी के साथ इन्हीं के परिवार द्वारा एवं इन्हीं की प्रेरणा से टोंक में पदम प्रभु भगवान की प्रतिमा स्थापित की। इसी के साथ भगवान की वेदी निर्माण में भी इनके द्वारा सहयोग किया गया। इनका परिवार भामाशाह कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं है धर्मशाला में भी कमरों के निर्माण, संत निवास, औषधालय आदि में इनके द्वारा सहयोग दिया जाता रहा है। यह सदा से संत सेवा में साधु के आहार विहार में अपनी पूर्ण सहभागिता देती रही है। इन्होंने कई पंचकल्याणकों में भी भाग लेकर इंद्र इंद्राणी बनाकर धर्म आराधना की है। सन 2018 में आचार्य श्री 108 इंद्रनंद जी महाराज द्वारा अतिशय क्षेत्र सांखना में कराए गए पंचकल्याणक में इन्हें भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। कई वर्षों से उनकी इच्छा रही कि मैं संसार का त्याग कर दीक्षा को ग्रहण करूं लेकिन यह समय अब आया है। जो निश्चित रूप से अनुमोदनीय है।
अभिषेक जेन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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