जल का सदुपयोग करते हुए दुरूपयोग को रोकें –आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज

धर्म

जल का सदुपयोग करते हुए दुरूपयोग को रोकें –आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज

अशोक नगर

— जल का सदुपयोग करना सीखे आप सम्पन्न हैआज आपके पास सम्पन्नता है तो आपको जल की कीमत समझ में नहीं आ रही हम साधु पैदल विहार करते रहते हैं तो देखते हैं कि पानी भरने के लिए लम्बी लम्बी लाइने लगी रहती है यहां तक कि आपस में झगड़े हो जाते हैं सिर्फ पानी के कारण और हमारा ध्यान ही नहीं है और हम जल को बर्बाद करते चले जा रहे हैं। जल भी जीव है हमें इस बात का ज्ञान ही नहीं है आज आपके पुण्य का उदय है इसलिए आपको सब सुविधाएं मिल रही है लेकिन आप सोचें कि जो लोग अभाव में जी रहे हैं उनको कितनी परेशानी हो रही है आपके जीवन में इस तरह के अभाव ना आये इसके लिए हम जल के दुरूपयोग को रोकें।आचार्य श्रीआर्जवसागर जी महाराज ने सुभाषगंज में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

 

 

 

हरियाली देखने को हमारी आंखें आतुर रहती है।
उन्होंने कहा कि आज हमारी आंखे हरियाली देखने को आतुर रहती है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दतोंन करते थे एक दिन दंतोन के लिए किसी ने नीम के पेड़ की पूरी डालीं तोड़ कर एक छोटी सी दंतोन गांधी जी को दी तो गांधी जी ने कहा कि भाई इतनी बड़ी डाल क्यों तोड़ दी उन्होंने इसकी सीख दी और अनर्थदण्ड से अवगत कराया इसलिए हमें छोटी छोटी बातें का ध्यान रखना चाहिए जल वायु पेड़ पौधों में भी जान होती है

वैज्ञानिकों ने इसे सिद्ध किया है ये सब चीजें करूणा की है एक वैष्णव साधु ने इतना तक कहा कि जैन साधु की तपस्या बहुत कठिन है

 

वे तन से तपस्या करते हुए आपको दिख जाते हैं लेकिन हमने महसूस किया कि वे तो मन से भी हिंसा की बात सोचते भी नहीं है ये बहुत कठिन है और वे करते हैं ये बहुत दुर्लभ है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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