हमे अपने बड़ो का सहारा लेना नहीं सहारा बनना है सुधासागर महाराज
आगरा
निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर महाराज ने एम डी जैन हरी पर्वत मे मंगल प्रवचन देते हुए कहा की भगवन की शरण जाना सोभाग्य है,परन्तु सहारा लेना दुर्भाग्य है हमे अपने बड़ो का सहारा लेना नहीं सहारा बनना है बेटे को सहारा देकर पिटा ला रहा है तो यह बेटे का दुर्भाग्य है महाराज श्री ने कहा की सहारा लेते ही आत्मा का विकास झुक जाता है ऐसे ऐसा करे कीमेरे काम स्वयं बने किसी का सहारा न लेना पडे
पूज्य पुरुष हमारी पूजा के लिए है
महाराज श्री ने कहा की पूज्य पुरुष हमारी पूजा के लिए है दान पुण्यहीनो को नहीं पुण्यवान और पूज्य पुरुषो को दिया जाता है

अपने से छोटे पुण्यहीन को सहयोग दिया जाता है जेसे चीटी को आटा गोशाला मे घास गरीबो को भोजन पानी आवास औषधि आदि उन्होने कहा राजा को सहयोग नहीं भेट देनी होती है सहयोग अभावग्रस्त को दिया जाता है।
भेट राजा को दी जाती है राजा के दरवाजे खाली हाथ नहीं जाना जिसका साक्षात् उदाहरण कृष्ण सुदामा महाराज श्री ने कहा हम मंदिर मे पूजा करने नहीं पूज्य बनने जा रहे है जेसे अनाज मे से कंकड़ को बीना जाता है उसी प्रकार भगवन की पूजा करना कहना मात्र पूजा अपने कल्याण के लिए है
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

