गुरु के उपकारों को हम कभी नहीं चुका सकते मुनि श्री भावसागर महाराज

धर्म

गुरु के उपकारों को हम कभी नहीं चुका सकते मुनि श्री भावसागर महाराज
घाटोल
वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर में पूज्य मुनि श्री 108 भाव सागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में त्याग की महत्ता को बताया। महाराज श्री ने कहा कि त्याग के समान कोई सुख नहीं होता है त्याग हमारी आत्मा को स्वस्थ और सुंदरतम बनाती है।

 

 

आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के प्रति कृतज्ञ भाव प्रकट करते हुए महाराज श्री ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की कृपा से हम सभी को मुनि दीक्षा प्राप्त हुई थी और गुरु के उपकारों को हम कभी नहीं चुका सकते। गुरु ही हमें सिखाते हैं कि परिश्रम से कभी मत हटो। दृढ़ निश्चय एवं श्रद्धा से कर्तव्य करो। गुरु के पास अनुभव का वैभव होता है।

 

 

 

पूज्य मुनि श्री 108 विमल सागर महाराज ने भी 25 मुनि दीक्षाओं की स्मृति को बताते हुए कहा कि नेमिनाथ भगवान के जन्म और तब कल्याण के दिन 25 उच्च शिक्षा प्राप्त बाल ब्रह्मचारियों की मुनि दीक्षा हुई थी तब जन सैलाब उमड़ रहा था।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *