खुरई नगर के नगर गौरव निराकुल सागर महाराज का अद्भुत संयोग 10 अगस्त को जन्म, 10 अगस्त को ही दीक्षा

धर्म
खुरई नगर के नगर गौरव निराकुल सागर महाराज का अद्भुत संयोग 10 अगस्त को जन्म, 10 अगस्त को ही दीक्षा

      खुरई मध्यप्रदेश की वह नगरी है जहा अनेक संतो का जन्म हुआ है ऐसे ही नगर गौरव है जो अब मुनि श्री 108 निराकुल सागर महाराज जैन धर्म की महती प्रभावना कर रहे है इनके जीवन मे अद्भुत संयोग जो बहुत कम होता इनकी दीक्षा कुछ वर्षो पूर्व 10 अगस्त को हुई थी जिस दिन इनका जन्म हुआ था उस दिन भी तारीख 10 अगस्त थी

 

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के संघ में एक मात्र मुनि हैं जिन्होंने खुरई में जन्म लिया। उनकी दीक्षा रामटेक में हुई थी । यह भी एक संयोग था की। मुनि दीक्षा लेने के दो दिन पूर्व ही वह प्राचीन जैन मंदिर में ब्रह्मचारी चंदन भैया के रूप में वृति श्रावक सुखलाल जैन की उत्कृष्ट समाधि करा रहे थे।
दीक्षा के पूर्व 1984 में ब्रह्मचर्य व्रत लिया था, जैन दर्शन, संस्कृत में की पीएचडी,की हुयी है
     जीवन पर एक नज़र
    खुरई नगर के गौरव मुनिश्री 108 निराकुल सागर महाराज मे धार्मिक संस्कार बचपन से ही थे।
दीक्षा के पूर्व चंदन भैया ने 1984 में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के सानिध्य में ब्रह्मचर्य व्रत लिया था। मुनिश्री निराकुल सागर महाराज ने एमकाम, एमए एवं पीएचडी, जैन दर्शन, संस्कृत प्राकृत भाषा में की।
           
इसके साथ ही एक्युप्रेशर, एक्यूपंचर की डिग्री लेकर उन्होने रामटेक में आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज  से दीक्षा ली थी बचपन से ही मुनिश्री निराकुलसागर महाराज सुबह 4 बजे उठकर स्वाध्याय आदि में रुचि रखते थे। संस्कार मुनिश्री को उनके गृहस्थ जीवन की दादी नर्मदा गुरहा से मिले थे। आज भी उनका लेखन काम, कविता पाठ, जो भी श्रवण करता है उसे कभी विस्मरण नहीं कर पाता।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

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