151 फीट स्टेचू ऑफ़ प्योरिटी अष्ट धातु से बन रही मुनिसुव्रतनाथ प्रतिमा निर्माण हेतु रामगंजमंडी आया रथ
समाज बंधुओं ने मुक्त हस्त से दिया अनुदान
रामगंजमंडी
विश्व की अनुपम कृति बनने जा रही 151 फीट ऊंची प्रतिमा जो अष्टधातु से निर्मित होगी जिसे स्टैचू ऑफ प्यूरेटी का नाम दिया गया है। यह प्रतिमा मुनीसुव्रत नाथ भगवान की अष्टधातु की होगी जो गुड़गांव में अष्टापद तीर्थ में निर्मित होने जा रही है। उसके लिए जगह-जगह रथ निकाले जा रहे है। वहीं गुरुवार की बेला में भी रामगंजमंडी यह रथ प्रभावना हेतु आया। जिसके लिए समाज बंधुओं ने मुक्त हस्त से अपना धातु दान किया एवं अपनी चंचला का उपयोग इस अनुपम कृति के निर्माण हेतु प्रदान किया अष्टापद तीर्थ से पधारे भैया जी विकास जैन ज्योतिषाचार्य ने प्रोजेक्टर पर मुनीसुव्रत नाथ भगवान की प्रतिमा के बारे में समझाया।
यह प्रतिमा कैसी होगी इसकी विशेष जानकारी
अष्टापद तीर्थ से पधारे भैया जी विकास जैन ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 151 फीट की होने जा रही भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा151 फीट उत्तंग होगी। प्रतिमा का पदमपीठ 100फीट चौड़ी, 100 फीट लंबी होगी। 30 फीट ऊंचा होगा।इसकी खास बात यह भी होगी की प्रतिमा के पीछे के भाग में 180 फुट का मनोहारी परिकर बनाया जाएगा। प्रतिमा के शीश पर 108 बालों का निर्माण होगा। बन रही प्रतिमा की चौड़ाई 60 फीट,मोटाई 35फुट,मुख 21 फुट,नाक 6 फुट, कान 9 फुट, हाथो की लम्बाई 77 फुट, पैरो की ऊंचाई75.5 फुट,तर्जिनी अंगुली 3.5 फुट कंधे से कंधे की दुरी 60 फुट की होगी। इसके विषय में भैया जी विकास जैन ज्योतिषाचार्य ने ज्यादा बताते हुए कहा कि इस प्रतिमा की चरण पाद 22 फुट, पैर का अंगूठा 5.5 फुट, आंख 3 फुट 7 इंच की होगी, गले की गोलाई 35 फुट, छाती की गोलाई 72 फुट, जंघा 27 फुट, नाभि ढाई फुट होगी। इसके साथ ही इसे इस प्रकार भूकंपरोधी बनाया गया 120 फुट नीव बनाई जाएगी ताकि इसे बचाया जा सके।कोशिश की जा रही है कि 9+ रिक्टर पैमाने के भूकंप को यह प्रतिमा सहजता से संभाल पाए


इस प्रतिमा के निर्माण के विषय में भैया जी विकास जैन ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस प्रतिमा के निर्माण के लिए सभी साधु संतो का आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ है। वह बताते हैं कि इस प्रतिमा का निर्माण अपने आप में एक प्रौद्योगिकी चमत्कार से कम नहीं होगा। इसे यथार्थ स्वरुप प्रदान करने के लिए शिल्पकार सभी बारीकियों पर विशेष ध्यान रखे हुए हैं इसे तैयार कर रहे हैं। इसके लिए भूवैज्ञानिकों व इंजीनियरों का दल आधार संरचना के डिज़ाइन पर काम कर रहा है। । इसके निर्माण में रोबोट का प्रयोग किया जाएगा। जो नासा के वैज्ञानिकों द्वारा प्रदान किया जा रहा है। इस प्रतिमा के निर्माण में सभी धातु जिसमें सोना चांदी तांबा पीतल जस्ता रांगा मिलक इत्यादि का मिश्रण को मिलाकर लगभग 6 माह में इस प्रतिमा का निर्माण कर देंगे। इसे बनाने के लिए तकनीक का नाम 3d मेटल प्रिंटिंग तकनीक का प्रयोग किया जाएगा।

प्रतिमा के निर्माण में कौन सी धातु का कितना प्रयोग होगा
विश्व इतिहास में बनने जा रही एक अलौकिक स्टेचू ऑफ़ प्योरिटी जिन प्रतिमा में लगने वाली धातुओ में 25000 टन तांबा, पीतल,10000 टन एल्युमीनियम, जस्ता, जर्मन सिल्वर, टिन,250kg सोना,3000 किलो चाँदी का उपयोग होगा।
स्टैच्यू ऑफ प्योरिटी के चार रथ भारतवर्ष में भ्रमण कर रहे हैं।श्री विकास जैन बताते हैं कि स्टैचू आफ प्योरिटी की प्रभावना एवं इसके लिए धातु एवं चंचला के सहयोग के लिए चार रथ भारतवर्ष में भ्रमण कर रहे हैं। जिसके द्वारा समस्त साधर्मी जन द्वारा मुक्त हस्त से धातुओं का सहयोग दिया जा रहा है एवं अपनी चंचला का उपयोग विश्व की अनमोल कृति के निर्माण में किया जा रहा है।

प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी धर्मचंद शास्त्री का योगदान अविस्मरणीय है।
151 फीट की बनाने जा रही स्टैच्यू ऑफ प्योरिटी जो विश्व की एक अनमोल कृति के रूप में होगी उसके निर्माण में उसके मार्गदर्शन के लिए प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी धर्म चंद जैन शास्त्री का योगदान अविस्मरणीय कहा जाएगा श्री शास्त्री का जन्म सागर नगर में हुआ उन्होंने छोटी सी उम्र में ही नैनवा नगर के गौरव आचार्य धर्म सागर महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेते हुए सप्तम प्रतिमा का व्रत लिया उन्होंने 200 से भी अधिक जैन साहित्य की रचना की है। एवं अनेक प्रतिष्ठा अपने प्रतिष्ठाचार्य के रूप में करवाई हैं। उन्हें विदेशों में सर्वाधिक प्रतिष्ठा कराने का भी श्रेय प्राप्त है। इन्हीं के सपने और इन्हीं के मार्गदर्शन में यह कार्य पूर्णता की ओर है। जिसे अविस्मरणीय कहा जाएगा।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
