उन्हीं महापुरुषों के चरण पूज्य होते हैं जिनके आचरण शुद्ध होते है मुनि श्री भाव सागर महाराज
घाटोल
मुनि श्री 108 भाव सागर महाराज ने धर्म सभा में आचरण के विषय में प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि चरण उन्हीं महापुरुषों के पूज्य होते हैं जिनके पास आचरण होता है, चरण के द्वारा ही मंजिल की यात्रा तय होती है।
चरण छूने को आचरण से जोड़ने की कला बताते हुए महाराज श्री ने कहा कि आचरण से युक्त चरण ही ऊर्जावान होते हैं। और उनके चरण छूने से ही ऊर्जा प्राप्त होती है। चरण धूल से बढ़कर जग में कोई चीज अनमोल नहीं होती है। उन्होंने कहा कि हर वस्तु का कोई ना कोई मूल्य है लेकिन चरणों का कोई मूल्य नहीं है। चरणों की महिमा तो शास्त्रों में भी गाई है। जन्मो जन्मो का अनंत पुण्य जब उदय में आता है तब प्रभु के चरण छूने को हमें मिलते हैं। जो प्रभु के चरण पकड़ कर बैठ जाता है, और सब कुछ प्रभु को अर्पण कर देता है उसके अनंत भव के पाप
क्षण भर में समाप्त हो जाते हैं।
शरीर में विद्यमान प्राण को विद्युत बताते हुए महाराज श्री ने कहा कि हमारे घर के भीतर बिजली विद्युतगृह से आती है उसमें कनेक्शन जुड़ा होने से। जब बटन दबाया जाता है और जैसे ही स्विच ओपन हो जाता है बल्ब जल जाता है। और घर में उजाला हो जाता है। इस प्रकार हमारे शरीर का प्राण विद्युत है। जिस भी अंग को विद्युत या बिजली छू लेती है वह अंग सक्रिय हो जाता है। बिजली बंद होते ही शरीर लड़खड़ा जाता है। हाथ पैर सभी बेकार हो जाते हैं। शरीर से बिजली के बाहर निकलने के मुख्य हैं हाथ पैर की अंगुलिया, हाथ और वाणी भी प्राण विद्युत के निर्गमन स्तोत्र है। पैर छूने का महत्व को बताते हुए कहा कि पैरों के अंगूठे और उंगलियां से बिजली निकलती है इसीलिए चरणों को छूना लाभदायक है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
