आज पीछी कमंडल रूपी संयम रथ निरंतर चल रहा है, इसका श्रेय प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांति सागर जी महाराज को है । आचार्य श्री वर्धमानसागर महाराज
उदयपुर
दिगंबर जैन साधु का संयम उपकरण पीछी और कमंडल है। यह जिन मुद्रा एवं करुणा का प्रतीक है, पीछी और कमंडल मॉडल साधु के स्वालंबन के दो हाथ है इनके बिना अहिंसा मय महाव्रत का पालन नहीं हो सकता आदान निक्षेपण समिति तथा प्रतिस्थापना समिति का पालन नहीं कर सकते । इस कारण समस्त दिगंबर साधु वर्ष में एक बार पीछी का परिवर्तन करते हैं, आचार्य श्री ने पीछी के गुण में बताया कि यह धूल ग्रहण नहीं करती, लघुता रहती है ,पसीना ग्रहण नहीं करती ,सुकुमार झुकने वाली होती है ।यहां तक भी देखा गया है कि मोर पंख यदि आंखों में लग जाए तो बहुत चुभता नहीं है इससे आंसू नहीं आते कष्ट नहीं होता ।सबसे बड़ी बात यह है कि मयूर स्वयं पंख छोड़ते हैं इस कारण कोई हिंसा भी नहीं होती

आज पीछी कमंडल रूपी संयम रथ निरंतर चल रहा है, इसका श्रेय प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांति सागर जी महाराज को है । यह मंगल देशना आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागर जी ने 32 साधुओं के पीछी परिवर्तन समारोह के अवसर पर महती धर्म सभा में प्रकट की ।


आचार्य श्री ने वर्ष 2024 के चातुर्मास के निवेदन पर बताया कि आचार्य संघ मेवाड़ या बागड़ में या अन्य स्थान , किसी भी क्षेत्र या नगर में या जंगल में हो आप सभी को 100 वा आचार्य पदारोहण गरिमा पूर्ण तरीके से मनाना है। पहले यह कहा जाता था कि दिगंबर धर्म में गुरु नहीं है किंतु आचार्य शांति सागर जी की देन है कि उन्होंने अनेक साधु बनाए।

आचार्य पदारोहण आप को उत्साह ,शक्ति, संकल्प के साथ मनाना है संकल्प , शक्ति और उत्साह होने से पुरुषार्थ सफल होता है ।इसके पूर्व भी अनेक बड़े-बड़े महोत्सव चाहे श्रवण बेलगोला का महामस्तकाभिषेक हो या महावीर स्वामी का महामस्तकाभिषेक हो सभी बड़े कार्यक्रम दृढ़ संकल्प शक्ति से पूर्ण हुए हैं। आज पंडित सुमेर चंद दिवाकर का जैन समाज पर उपकार ऋण है कि उन्होंने अगर चारित्र चक्रवर्ती ग्रंथ नहीं लिखते तो उनके जीवन से हम आप परिचित नहीं हो पाते।इसलिए अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान रूपी दीपक से दूर करने का प्रयास करें।
आचार्य श्री ने आगे बताया कि जिन्होंने साधुओं को संयम उपकरण पीछी देकर अनुमोदना की है, उन्होंने पुण्य का अर्जन किया है मयूर पीछी से कोमल वस्तु संसार में नहीं है इस महोत्सव को आपने आंखों से देखा है साधु एक वर्ष में मयूर पीछी से सूक्ष्म से सूक्ष्म जीवो की रक्षा करते हैं ,अहिंसा महाव्रत के परिपालन का अन्य कोई उदाहरण देखने में नहीं आता है आपने जीवन में पुरुषार्थ से और पुण्य से जो अर्जित द्रव्य का सदुपयोग त्याग करने में पीछी देने में किया है इससे पुण्य की प्राप्ति होगी आचार्य श्री शांति सागर जी ने 20वीं शताब्दी में धर्म का प्रतिपादन एवं परिपालन किया अनेक भव्य जीवो ने उनकी आगम अनुसार क्रिया देखकर उनका मन भक्ति से सराबोर हो गया। श्रावक दान देने का अधिकारी है राजा श्रेयांश ने श्री आदिनाथ भगवान को सर्वप्रथम आहार दान दिया था ,इसी प्रकार प्रतापगढ़ के जवेरी परिवार ने अपने द्रव्य का उपयोग कर आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का दक्षिण भारत से उत्तर भारत की ओर संघपति बनकर तीर्थ यात्रा कराई। आपको आचार्य श्री के संदेश अनुसार संयम धारण करना चाहिए डरो मत संयम धारण करो इस वाक्य से कितनों का जीवन सुरक्षित हो गया आप भी संयम धारण कर जीवन को धन्य कर सकते हैं।

इसके पूर्व आचार्य संघ के मंचासीन होने पर आचार्य शांति सागर जी एवं सभी पूर्वाचार्य के चित्र का अनावरण कर दीप प्रवज्लन आमंत्रित अतिथियों सुरेश सबलावत जयपुर, राजेश सेठी कलकत्ता, राजेश बी शाह अहमदाबाद, मिलाप कोठरी अहमदाबाद, सनत जैन इंदौर, तथा स्थानीय उदयपुर समाज के सभी अध्यक्ष ने किया। ईशान जैन द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया ।इस अवसर पर आचार्य शांति सागर जी के गुणानुवाद पर
निर्ग्रंथ महर्षि कलर बुक का लोकार्पण आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज एवं बाहर से आए अतिथियों द्वारा किया गया
सुरेश पद्मावत पारस चितोड़ा अनुसार इस अवसर पर वर्ष 2023 के चातुर्मास का मंगल कलश पंडित जवाहरलाल जी शास्त्री भिंडर को प्रदान किया गया ।इस अवसर पर पंडित जी की धर्म पत्नी ने बताया कि आचार्य श्री का आगमन पंडित जी के लिए संजीवनी रूप है।आचार्य श्री के आशीर्वाद से आप बोलने भी लग गए। और पहले से बहुत ही अधिक स्वस्थ हो गए हैं हमारे परिवार के लिए यह चमत्कार ही है आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन एवं पूजन करने का सौभाग्य श्री मिलाप जी कोठारी अहमदाबाद को प्राप्त हुआ जिनवाणी राजेश बी अहमदाबाद में भेंट की । इस अवसर पर सुरेश पद्मावत,शांति लाल वेलावत ने भी संबोधित किया।आचार्य श्री को नवीन पीछी संघ के गजू भैय्या एवम् सभी भैय्या दीदियों ने दी। पुरानी पीछी लेने का सौभाग्य श्री शांतिलाल वेलावत परिवार को प्राप्त हुआ।संघ के सभी साधुओं को नवीन पीछी देने और पुरानी पीछी लेने का सौभाग्य चयनित पुण्यशाली परिवारों को प्राप्त हुआ मंच संचालन मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवम आर्यिका श्री महायश मती ने किया। कार्यक्रम संचालन डा राजेश ने किया इस अवसर पर राजस्थान के अनेक नगरों,मध्य प्रदेश,पश्चिमबंगाल,महाराष्ट्र,कर्नाटक, आसाम,आदि अनेक राज्यों के भक्त कार्यक्रम में शामिल हुए ।
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
