77 वां अवतरण दिवस धूमधाम से मनाया गयाआचार्य श्री की 1500 पूजन लिखी गई है जो वर्ल्ड रिकॉर्ड है भारत को उन्नत बनाने के लिए सूत्र देते रहते है भावसागर महाराज

धर्म

77 वां अवतरण दिवस धूमधाम से मनाया गयाआचार्य श्री की 1500 पूजन लिखी गई है जो वर्ल्ड रिकॉर्ड है भारत को उन्नत बनाने के लिए सूत्र देते रहते है भावसागर महाराज
घाटोल
वासूपूज्य दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री विमल सागर, मुनि अनंत सागर, मुनि धर्म सागरभाव सागर महाराज‌ के सानिध्य में सर्वश्रेष्ठ साधक परम पूज्य आचार्य विद्यासागर महाराज का 77 वां अवतरण दिवस पूरे विश्व सहित घाटोल में प्रातः काल की बेला में आचार्य श्री की महापूजन ,शास्त्र अर्पण ,पाद प्रक्षालन. सांस्कृतिक कार्यक्रम,वृक्षारोपण, गरीबों को भोजन,औषधि,वस्त्रदान, मिष्ठान वितरण के साथ मनाया गया,

 

 

इस अवसर पर पंचमहागुरू ग्रुप का गठन किया गया , पंचकल्याणक समिति ने पंच कल्याणक की तैयारियों के लिए श्रीफल अर्पण किया इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री विमल सागर महाराज ने कहा कि 77 का अंक महत्वपूर्ण है, आचार्य श्री ने नैनागिर में कहा था कि हमारे साथ सर्प विश्राम करते है ,आचार्य श्री की महान तपस्या, साधना है, जन्म की शुरुआत खोटे कार्यों से करेंगे तो वर्ष खराब होगा जैसा मुनि भाव सागर महाराज ने बताया है कि विद्याधर के जन्म होने के बाद देश स्वतंत्र हो गया था ,इस जगत में प्रभु और गुरु महत्वपूर्ण है और सर्वश्रेष्ठ है ,गुरुदेव ने इतना बड़ा उपहार दिया है ,भारत को उन्नत बनाने के लिए सूत्र देते रहते है,

 

 

मुनि श्री अनंत सागर महाराज ने कहा कि आचार्य ज्ञान सागर महाराज ने कहा था कि विद्या सागर एक नया इतिहास रचेंगे, एक बार आचार्य श्री ने 30 घंटे खड़े होकर ध्यान लगाया था।

मुनि श्री भावसागर महाराज ने कहा कि आचार्य श्री ने जन्म लेकर इस धरती को धन्य किया, आचार्य श्री के जन्म होने के बाद देश आजाद हुआ ,आचार्य श्री अध्यात्म के ऐसे प्रखर वक्ता है जिन्होंने अपने कृतित्व से साधुता को सार्थक करते हुए भारतीय संस्कृति की गरिमा को अक्षुण्ण बना रखा है, विद्याधर बचपन से ही अपनी बंद मुट्ठियों में अद्भुत आत्म संपदा और सुकोमल पगतलियों से सारा मोक्षमार्ग पांव पांव चलकर तय करने की क्षमता लेकर जन्मे थे,

 

 

जो संतो के हिमालय है, उनके यश के फैलाव के समक्ष एशिया महाद्वीप का क्षेत्रफल छोटा लगने लगता है, उन की चिंतन मनन की गंभीरताए


प्रशांत सागर को उथला कर देती है ,उन्होंने हिंसा के तांडव के बीच गौशालाये खोलकर अहिंसा का शंखनाद किया ,हथकरघा के माध्यम से कैदियों को बुरी आदतों से दूर करके आजीविका का साधन प्रदान किया,

 

 

 

आचार्य श्री ने 51 हजार किलोमीटर की पद यात्रा की है ,1100 गायों की रक्षा के लिए रोग में कष्ट होने पर भी देखने गए ,आचार्य श्री की 1500 पूजन लिखी गई है जो वर्ल्ड रिकॉर्ड है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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