हमारे मन में ह्रदय में जो आत्मा रुपी भगवान विराजमान है उसको जागृत करने के लिए मंदिर है। आचार्य कनक नंदी

धर्म

हमारे मन में ह्रदय में जो आत्मा रुपी भगवान विराजमान है उसको जागृत करने के लिए मंदिर है। आचार्य कनक नंदी
भीलुडा
ज्ञान विज्ञान दिवाकर आचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में बताया कि हमारे मन में ह्रदय में जो आत्मा रुपी भगवान विराजमान है उसको जागृत करने के लिए मंदिर है। माचिस व तिली के घर्षण से आग जलती है वैसे ही भगवान के दर्शन से उनके जैसे बनने की इच्छा जागृत होती है। तिली देव शास्त्र गुरु है तथा माचिस भगवान का दर्शन करने वाले भव्य जीव है। देव शास्त्र गुरु का सही सदुपयोग भव्य जीव करें तो उनकी अंतरात्मा सद्गुरु के घर्षण से जागृत होगी सही जगह पर घर्षण करने से आत्मा परमात्मा अवश्य बनेगी।

 

 

 

 

 

 

उदाहरण के माध्यम से बताया की एक व्यक्ति के पास पारस मणि था वह बार-बार उस पर लोहा छुआ रहा था परंतु वह सोना नहीं बना थोड़े दिनों बाद दूसरे व्यक्ति ने अपने पास से लोहे का टुकड़ा दिया उसको घर्षण करने से सोना बन गया। उसने उसका कारण पूछा तो दूसरे व्यक्ति ने बताया कि तुम्हारे लोहे पर जंग लगा हुआ था अतः सोना नहीं बन रहा था इसी प्रकार हमारी आत्मा पर भावो में राग द्वेष लोभ मोहमाया दिखावा ईर्ष्या घृणा आदि का जंग लगा हुआ है अतः भगवान रूपी पारसमणि से आत्मा परमात्मा नहीं बन रहा है। सब प्रक्रिया क्रिया कांड सही करते हो परंतु सूक्ष्म भाव का अंतर भेद होने से आत्मा रूपी लोहा भगवान रूपी सोना नहीं बनता।

 

 

 

 

 

उन्होंने कहा धर्म आत्मा का स्वभाव है सरल सहज पवित्र है इसे प्राप्त करना अति कठिन भी है तथा अति सरल भी है। भगवान तथा भक्तों में निश्चय नय से कोई भी भेद नहीं है और व्यवहार नय से देखें तो बहुत अंतर है।
विजय लक्ष्मी जैन से प्राप्त जानकारी

संकलन
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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