ब्रह्मचारी मोती भैया की सल्लेखना पूर्वक समाधि की और अग्रसर

धर्म

ब्रह्मचारी मोती भैया की सल्लेखना पूर्वक समाधि की और अग्रसर 
इंदौर
विश्व वंदनीय आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के शिष्य वंदनीय ब्रह्मचारीमोतीलाल जी (उदासीन आश्रम इंदौर में साधनारत* जिनकी संलेखना आश्रम परिसर में 12 ब्र• भैया जी के सानिध्य में चल रही है। संलेखना समाधि की जानकारी पूज्य गुरुदेव तक समय समय पहुचाई जा रही है,

 

 

विवरण

आज से 12 वर्ष पूर्व ब्रह्मचारी भैया को ब्रह्मचारी सुनील भैया जी द्वारा दो प्रतिमा के व्रत दिए थे। पूज्य आचार्य श्री ने आज दोपहर में 3 बजे ब्र• अनिल भैया को बुलाकर कहा की सल्लेखनारत ब्र• भैया जी को 10 प्रतिमा के व्रत दे दो। साथ ही आर्शीवाद देते हुए उनको व्रती परीतसागर नाम दिया गया है.।

 

 


धन्य है ऐसे श्रावक धन्य है ऐसे वृत्ति साधक जो अपनी मानव देह को त्याग की ओर अग्रसर कर के धनी कर रहे हैं जीवन का अंतिम लक्ष्य सल्लेखना पूर्वक समाधि होता है

 

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उसी मार्ग पर ब्रह्मचारी भैया चल रहे हैं हम यही कामना करते हैं कि उनकी उत्कृष्ट समाधि हो।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंज मंडी

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