श्री रामचंद्र जी जैसे संस्कार अपनाएं बड़ों को कभी युद्ध में ना लड़ाए सुधा सागर जी महाराज
आगरा
पूज्य मुनि श्री सुधा सागर महाराज ने एम.डी.जैन हरी पर्वत पर अपने उद्बोधन में कहा कि श्री रामचंद्र जी जैसे संस्कारों को अपनाएं
उन्होंने विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि-श्री रामचन्द्रजी ने रावण युद्ध मे कहा गुरु मेरे लिए नही में गुरु के लिए हु। श्री रामचन्दजी ने अपने बड़ो को कभी युद्ध मे नहीं लड़ाए।वही दुर्योधन ने अपने से बड़ो को युद्ध मे लडाए व उनको मरवा दिया। श्रीरामचन्द्र जी जैसे संस्कार अपनाये।
उन्होंने आगे गुरु के विषय में भी कहा कि जीवन में राजनीतिक गुरु चाणक्य जैसा होना चाहिए समझाया कि गुरु पर विश्वास मत करना, अपने अधीनस्थ के प्रति शत्रुवत व्यवहार करें,बड़े छोटे के प्रति दुश्मन के समान कठोर होना चाहिए, कठोरता दुश्मनो के साथ नहीं,बल्की अधीनस्थ के प्रति कठोर होना चाहिए।
पूज्यश्री ने कहा कि-दुनिया दुश्मन से पीटती है हम गुरु से पीट रहे सौभाग्य माने हम गुरु से पीट रहे हैं,अपनों से बडों से प्रशंसा सुनने का प्रयास मत करना,कभी भी गुरु से अपनों से प्रशंसा सुनने का भाव मत करना।
उन्होंने इस बात पर भी ध्यान आकृष्ट किया कि यदि तुम्हारे गार्जियन तुम्हारी प्रशंसा करने लग जायेंगे तो आपका विकास रुक जायेगा। एक पिता अपने बेटे दारा निर्मित चित्र को देखकर उन्हें रिजेक्ट कर देता बेटे ने सौ चित्र बनाये इसके बाद एक सौ एक वा चौराहे पर लगा कर लोगों के साथ अपने पिता की प्रशंसा तो बटोर ली लेकिन विकास रुक गया।
पिता ने बेटे द्वारा बनाये सभी चित्रो को देखकर उनके सुधार की पूरी कहानी सामने रखी। यदि पिता दोषों का निवारण ना करें तो बेटे के गुण प्रकट नहीं होंगे बेटे के गुणो को प्रकट करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देता है।
-बडे लोग छोटे को अच्छा रास्ता नही काटों का रास्ता दिखाए फूलों का रास्ता नही दिखाए,बडें सुविधा का रास्ता नही दिखाए कठिन रास्ता दिखाए, बड़े छोटे को विश्वास नही दिलाए बल्कि विश्वासघात करे.हमारे अधीनस्थ लोगों को हमारे अनुकूल नही चलाये।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
