हर परिवार में एक दूसरे की प्रति सम्मान, आदर एवम बहुमान की परंपराएं समाप्त होती जा रही हैं अजीत सागर महाराज
सागर
पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री अजीत सागर महाराज ने अपने प्रवचन में वर्तमान की दशा पर कटाक्ष किया और कहां की नारियों में शील आचरण होना चाहिए।
महाराज श्री ने आज के वर्तमान परिपेक्ष पर कटाक्ष किया और कहा कि आज परिवार में एक दूसरे के प्रति सम्मान, आदर, बहुमान की परंपरा समाप्त हो गई है। पहले की अगर बात की जाए तो परिवार के अंदर बहुत ज्यादा लोग साथ में रहते थे। लेकिन आज एक बेटा और एक बेटी है। आज भरे भूरे परिवार में कोई अपनी बेटी देना नहीं चाहता।
मूकमाटी महाकाव्य के ऊपर अपने उद्बोधन के समय महाराज श्री ने कहा आज से कुछ सालों पहले भरा पूरा परिवार होता था एक दूसरे के प्रति आदर एवं सम्मान की भावना थी, लेकिन आज स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है, केवल पैसे को प्राथमिकता दी जाती है। मुनि श्री ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यहां तक की जहां माता-पिता नौकरी पर जाते हैं और बच्चों को आया के सुपुर्द कर दिया जाता है। इसका यह घातक परिणाम होगा कि जब बच्चे बड़े होंगे मां-बाप का संरक्षण व देखभाल नहीं करेंगे उन्हें वे अपने हाल पर छोड़ देंगे। और यही कहते दिखाई देंगे कि आप दोनों ने हमारी जिम्मेदारी नहीं उठाई है। तो बुढ़ापे में हम क्यों उठाएं। आज की दशा पर मुनि श्री ने यह कहा कि आज पैसा मुख्य हो गया है और व्यापार गौण हो गया है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
