अगर किसी जैन संत को मारा गया अत्याचार किया गया तो जैन धर्म के साथ अन्याय है ललितप्रभ सागर महाराज
जैन आचार्य काम नंदी जी मुनिराज की निर्मम हत्या से समस्त जैन समाज के साथ समस्त जैन संतों में भारी रोष प्रकट किया है वही क्रांतिकारी संत धर्म प्रभावक ललितप्रभ सागर महाराज जी ने भी कड़ा दुख प्रकट किया
उन्होंने अपने ओजस्वी मार्मिक एवं क्रांतिकारी उद्बोधन में समाज को जागृत होने के लिए कहा और कहा कि आज एक मरे हैं कल और किसी को मार दिया जाएगा काट दिया जाएगा। सम्मेद शिखर,गिरनार, पालीताना का जिक्र करते हुए कहा कि इन तीर्थ क्षेत्रों पर किसी श्रावक को साधु संतों को मारा गया अन्याय हुआ तो समझ लेना या हमारे जैन धर्म पर अन्याय हुआ है। हमें भगवान को बचाना है,भगवान के धर्म को बचाना है, हम बाद में बात करेंगे दिगंबर और श्वेतांबर की। मैं देख रहा हूं भारतवर्ष में इतना बड़ा दिगंबर जैन समाज है लेकिन अभी तक जागा नहीं है। श्वेतांबर, स्थानकवासी तेरहपंथी की बात तो बाद में है। अजेनो की बात बाद में है। यह हत्याकांड ऐसा है, इस वक्त हिंदू समाज के साधु-संतों को भी जैन समाज का समर्थन करना चाहिए था। अगर वे न्याय में, नीति में, राम में, कृष्ण में, हनुमान में, विश्वास करते हैं तो उन्हें समर्थन करना चाहिए कि ऐसे हत्याकांड नहीं हो सकें।
पूज्यश्री ने मुखर स्वर में कहा की यह हमारे साधु-संतों भारतवर्ष के लिए ऋषि-मुनियों एवं श्रमण परंपरा के लिए कलंक है। उन्होंने गुणधरनंदी महाराज को थैंक्यू कहना चाहूंगा कि आज एक बंदा तो जगा , एक तो सामने आया, वरना साधु संत के अंग उपांग सड़ सड़ के खत्म हो जाते है, बाद में मीडिया में यह आता तुम्हारे साधु रातों-रात भग गए। उन्हें मारा गया है पूज्यश्री ने करुणामय शब्दों में कहा कि यदि आपके ह्रदय में भगवान बैठे हो, प्रभु के प्रति विश्वास हो तो जागना चाहिए, अलग-अलग पंथों के हो दिगंबरो को सबसे पहले जागना चाहिए था। एक होकर आगे आना चाहिए था और जमकर एक आंदोलन छेड़ना चाहिए था।

उन्होंने मांग की कि भारतवर्ष के अहिंसक साधुओं की सुरक्षा हो, उनके मंदिरों की सुरक्षा हो।
यही वक्त है अभी की दी हुई चोट परिणाम लाएगी। सरकारों को झुकना होगा, मांगना होगा, सबसे अधिक टैक्स देते हैं, सबसे अधिक न्याय की मांग करते हैं, किसी का कुछ नहीं छीनते है, जैन समाज ने भारतवर्ष की उन्नति के लिए काम किया है उसके साथ ऐसा कैसे हो गया। ऐसा मैंने कभी नहीं सुना कि ऐसा किसी के साथ हुआ हो। कितने टुकड़े कर दिए क्या गाजर मूली समझ रखा था साधु को । ऐसे लोगों को सजा मिलनी ही चाहिए। सबक मिलना ही चाहिए इस पर सालों साल चर्चा होनी चाहिए। ताकि लोग समझ जाएं कि जैन समाज चूड़ी पहना हुआ नहीं है। वह मजबूत है, उसके पास भी दिल है, उसके पास भी आत्मा है। यह साधु जो मरे हैं उनकी भी आत्मा थी, उनकी भी साधना थी। भले ही वह मठ में रहे हो लेकिन वह भी इंसान थे। जिन शासन के प्रतीक थे। पढ़े लिखे थे, विद्वान थे, समयसार पड़े हुए थे। आज जिन घर में आग लगी है अगर हम तमाशा देखते हैं कल वह आग हमारे घर में भी लग सकती है।
न्याय नीति की बात करनी चाहिए यदि मानव के धरातल पर देखें तो इस हत्याकांड की निंदा करनी चाहिए फिर मैं तो जैन साधु हूं। वह दिगंबर हैं,मैं श्वेतांबर हु। मैं दिगंबर जैन समाज के सभी वरिष्ठ जनों से कहूंगा की आगे आओ नींद उड़ाओ, बाहर आओ भगवान महावीर की परंपरा को बचाओ। नहीं तो यह सब लोग खा जाएंगे, छीन ले जाएंगे। कुछ भी नहीं बचेगा जितना हमारे पास और श्वेतांबर समाज से भी कहना चाहूंगा श्वेतांबर और दिगंबर दोनों अहिंसक हैं दोनों महावीर की संताने हैं। वह आपको हमको निगलने के लिए दुश्मन बैठे हैं। हमारे मंदिरों को हड़पने के लिए हमारी संपत्तियों को हड़पने के लिए बैठे हैं। ऐसे-ऐसे कानून आ रहे हैं उन्हें आपकी हमारी फिक्र नहीं है उन्हें अरिहंत भगवान की फिक्र नहीं है। इसलिए हम सब को कटिबद्ध होना होगा।
उन्होंने कहा यह ऐसा वक्त है यह संक्रमण काल है। इस वक्त चुप रहना हमारे लिए बहुत खतरनाक होगा। निग्रंथ आत्मा को शांति मिले पूरा पूरा न्याय मिले। एक आत्मा का बलिदान बेकार नहीं जाना चाहिए। पुलिस अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तुम जैन समाज के साधु साध्वियो को साग भाजी ना समझो। समस्त राजनेताओं को वह सरकारों को कहा कि सबसे पहले इन्हें जैन साधुओ को बचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। जैन साधु का बैंक बैलेंस होता नहीं। पैदल यात्रा करता है। केश लोचन करता है। कितना बलिदान दिया है इस कलिकाल में कौन इतना करता है। यह भोगवादी दुनिया है। उन्होंने अंत में कहा कि कमर कसो और आगे बढ़ो आने वाला जमाना हमारे लिए खतरनाक हो उसके पहले हम प्रबंध करें। कम से कम हम 25 से 50 साल महावीर भगवान के शासनकाल को बचाने का प्रयास करें। कहना चाहूंगा कि आज किसी के पैर के नीचे पानी आया है कल आपके पैर के नीचे भी पानी आएगा। सावधान रहो और आगे बढ़ो। बस जिन शासन की जय जयकार हो।
संकलित अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
