यदि झुकना सीखे तो उसके कई फायदे हैं अजीत सागर महाराज
सागर
पूज्य मुनि श्री अजीत सागर महाराज ने अपने उद्बोधन में आपसे पुण्य की परिणीति के लिए जय जिनेंद्र या जय श्री राम बोलना चाहिए।
महाराज श्री ने अपनी वाणी से बताया कि हाथ मिलाने और हाथ जोड़ने यह दोनों अलग-अलग बातें होती हैं उन्होंने दोनों का महत्व बताया कि हाथ मिलाने से हदय जुड़ जाए यह जरूरी नहीं है। लेकिन जय श्री राम एवं जय जिनेंद्र बोलने से उतने ही क्षण में पाप आदि से पुण्य की परिणति हो जाती है। पूज्य महाराज श्री ने सीख देते हुए बताया कि यदि झुकना नहीं सीखे तो अकड़ ही भरी रहेगी और यदि हमने झुकना सीख लिया तो इसके कई फायदे हो जाते हैं। आम के पेड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि आम के पेड़ होते हैं वह झुक जाते हैं चलिए सब उसके पास पहुंच जाते हैं और सूखे पेड़ के पास कोई नहीं जाना चाहता। अपने मन में असफलताएं कभी आने नहीं देना चाहिए।
हमारे द्वारा किसी की वाणी पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता आदमी के पास तो सिर्फ दो आंखें, दो कान, और मुंह होता है, मुंह जब ही खुलता है जब हम इसे खोलते हैं। जरूरत पड़ने पर बोलना एवं हितकारी वचन बोलना चाहिए। जिससे सामने वाला प्रसन्न हो।
उन्होंने मुनि काम कुमार नंदी महाराज की हुई निर्मम हत्या के संबंध में कहा कि धर्म और संतो पर कुठाराघात हो तो चुप नहीं रहना चाहिए। वहा पर बोलना चाहिए। जीवन रूपी नदी की कल्पना करना चाहिए। मोह होने से संपत्ति छोड़ना बहुत कठिन होता है। महाराज श्री ने तीर्थंकर का उदाहरण देते हुए बताया कि तीर्थंकर भगवान ने सभी प्रकार का राजपाट छोड़कर दीक्षा ली भगवान बन गए।
आचार्य श्री के विषय में बताया कि एक बार किसी ने आचार्यश्री से पूछ लिया था कि आपने क्या-क्या छोड़ा है उन्होंने बताया कि ना तो मैंने घर बनाया, ना ही घरवाले मेरे पास तो कुछ नहीं था, मोह को कम किया यही बड़ी साधना है। अंत में महाराज श्री ने कहा कि आप लोगों का लक्ष्य भी मोक्ष होना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
