संघर्ष से कभी डरना नहीं चाहिए मुनि श्री अजीत सागर महाराज

धर्म

संघर्ष से कभी डरना नहीं चाहिए मुनि श्री अजीत सागर महाराज
सागर
आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री अजीत सागर महाराज का वर्षायोग भाग्योदय तीर्थ सागर में चल रहा है पूज्य मुनि श्री द्वारा आचार्य श्री विद्यासागर महाराज द्वारा रचित मूक माटी महाकाव्य का स्वाध्याय अध्ययन कराया जा रहा है।

पूज्यश्री ने अपने उद्बोधन में संघर्ष को सहते हुए कभी ना घबराने की बात को कहते हुए इससे ना करने को कहा संघर्ष आने पर हम घबरा जाते हैं और साहस संतोष को खो देते हैं, कर्म उदय के लिए महाराज श्री ने कहा कि कर्म उदय कभी साथ रहने वाला नहीं है यह भी निकल जाता है यदि संतो की आज्ञा का पालन हम करते हैं तो सभी काम निर्विघ्नं होते हैं।

 

 

उन्होंने कहा कि संघर्ष ना आया उसके पहले कि हम टूट जाएं टीका टिप्पणी सुनकर भाग जाएं तो सच्चे खिलाड़ी नहीं है। ज्ञानी जनों को सीख देते हुए महाराज ने कहा कि इन्हें कभी चिल्लाना नहीं चाहिए। लक्ष्य की ओर ध्यान होना चाहिए, विजय होगी। सत्य हमेशा शाश्वत रहता है। हमें महापुरुषों को देखकर अपना लक्ष्य बनाना चाहिए व्यवस्थित होकर चलने को कहते हुए कहा की जो इस तरह से चलता है उसके काम अपने आप होते जाते हैं। किसी भी काम को करने के अनुकूलता की प्रतीक्षा देखना सही पुरुषार्थ नहीं है।

गुरुवर के विषय में वर्णन करते हुए कहा कि गुरुदेव का करती हूं कि समता की परीक्षा प्रतिकूलता में होती है। अनुकूलता में नहीं हम सोचते हैं कि हमें कहीं जाना होता है तो हम कहते हैं कि व्यवस्था ठीक होगी तो जाएंगे, और यह सोचकर हम रुक जाते हैं बाद में जब दूसरे लोगों से चर्चा होती है तो हमारा मन बनने लगता है। प्रतिकूलता में क्षमता रखना ज्ञानियों का काम है। जो दृढ़ संकल्पित होते हैं वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। संघर्ष में जीवन का उपसंहार नियम से हर्षमय होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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