अपराध किसी को मालूम नहीं लेकिन फिर भी अपराध कबूल कर लेने वाला व्यक्ति एक दिन महान बनता है मुनि श्री सुधा सागर महाराज
आगरा
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव सुधा सागर महाराज ने हरी पर्वत पर अपने प्रवचन में अपराध के विषय में बताया कि अपराध किसी को मालूम नहीं लेकिन अपराध को कबूल कर देने वाला व्यक्ति 1 दिन महान बनता है।
पूज्य मुनिश्री सुधासागर महाराज ने कहा गलत कठोर भाव से अपराध करने वाला बडा अपराधी अपराध को स्वीकार कर ले वहीं निरपराधी है। वह महान है।
पूज्य श्री ने कहा अपराधी निरापराधि से श्रेष्ठ हो सकता है।यदि किसी को मालुम नही औ गुरु के पास जाकर पास जाकर अपराध कबुल कर रहा है। अपराधी भी अच्छा है। और एक दिन सुधर जाएगा।
कुछ लोग अंदर से अच्छे होते है बाहर से अच्छे नहीं,कुछ लोग अंदर से धर्मी बाहर से अधर्मी होते हैं काया से धर्मी मन से अधर्मी होते है, बाहर से धर्म मे रुचि नहीं है तो की में मंदिर धर्म क्यों कर रहे हैं। मंदिर में यदि बुरा भाव किये तो हमारी दुर्गती है फिर बगैर मन के आ रहे हो तो भी आप को मंदिर आना है.बुरे भाव से मंदिर जा रहे हो तो भी जाओ,
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
