बड़ों के सामने छोटे बनो, छोटों को जोड़ कर रखो’अजीत सागर महाराज
सागर
आज मनुष्य की दशा उस तोते के समान हो गई है जो जाल में फंसने के बाद भी यह रट लगाए रहता है कि
शिकारी आता है, जाल फैलाता है, दाना डालता है,जाल में नहीं फंसना चाहिए। बड़ों के सामने छोटे बनकर रहो और छोटों को जोड़ कर रखो।
यह उद्गार मुनिश्री अजित सागर महाराज ने व्यक्त किए। वे श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर अंकुर कॉलोनी में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जीवन में सांसारिक संयोग तो बहुत मिलते है परंतु परमार्थ संयोग बड़ी मुश्किल से मिलते है।हमारे द्वारा यह पुरुषार्थ करके प्राप्त किएजाते हैं। देव पूजा एवं दान आदि परमार्थ संयोग जो मनुष्य पर्याय का सर्वश्रेष्ठ लक्षण है। हर व्यक्ति कोअवश्य करना चाहिए। हमें अपने जीवन में संत के द्वारा कहे गए वचनों को चरित्र में लाना चाहिए। यह हम सब जानते है। पर करते नहींउन्होंने कहा मनुष्य जीवन बड़ी
दुर्लभता से मिला है, हमें इसका मूल्य समझना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
