दीक्षा लेते हैं तो गुरु का आशीर्वाद भी रहता है आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
डोंगरगढ़
संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का चंद्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ में 56वा मुनि दीक्षा महोत्सव मनाया गया इस अवसर पर मंदिर जी में वह आचार्य श्री के मच आसपास विशेष सजावट की गई। श्रीजी का अभिषेक शांति धारा संपन्न होने के बाद आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की भक्ति के साथ पूजा अर्चना की गई। जिसमें अष्ट द्रव्य के विशेष थाल सजाकर आचार्य श्री की भक्ति करते हुए अर्ध समर्पित किए गए।
आचार्य श्री ने दीक्षा दिवस पर बोलते हुए कहा कि स्मृति वर्तमान में होती है लेकिन उसका अनुभव नहीं होता है आचार्य कुंदकुंद ने बताया है कि दीक्षा के दिन को याद करने से क्या होता है शिक्षा के दिन को याद नहीं करना किंतु दीक्षा को धारण क्यों किया है उसको याद रखने को कहा है। आप लोग घर में प्रवेश करते हैं, जब कहीं जाते हैं तो वापस घर ही आते हैं किंतु दीक्षा होने के उपरांत लौटने की बात नहीं होती है। यदि लौटना ही है तो फिर जाना ही नहीं चाहिए। इस रहस्य को जो समझ गया वह कभी लौटने की बात नहीं करता। दुआ सिर्फ आगे बढ़ने की और जाता है। और जो दीक्षा उपरांत छोटे घर से निकलकर बड़े घर में रह रहा है उसे वह रहस्य अभी भी समझ में नहीं आया है। दीक्षा ली जाती है, दी नहीं जाती और पद दिया जाता है लिया नहीं जाता। जब दीक्षा लेते हैं तो गुरु का आशीर्वाद भी रहता है।

आचार्य ने कहा कि यथा योग्य दीक्षा के उपरांत नियमों का पालन आदि रिट्वी पूर्वक एवं श्रद्धा के साथ करते हैं। तो इस नदी का हमें अनुभव नहीं हो सकता है वर्तमान में प्रत्यक्ष होता है वही अनुभव में आता है। संसार सब कुछ दिखा रहा है लेकिन देखने वाला नहीं दिखता गुरु ने मुझे गुरु समय दिया लघु बनने के लिए पहले मुनि महाराज जंगलों में रहते थे।
बाबरिया परिवार को मिला आहरचर्या का सौभाग्य
शुक्रवार को आचार्य श्री को नवधा भक्ति पूर्वक आहार कराने का सौभाग्य सुरेश कुमार, रेखा जैन, सिद्धार्थ जैन, ब्रह्मचारिणी रीना दीदी बाबरियापरिवार रामगंज मंडी राजस्थान
निवासी को प्राप्त हुआ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
