सिद्धचक्र महामंडल विधान कर सिद्ध प्रभु के समान कर्मों से मुक्त होने की भावना भाते है विज्ञमति माताजी

धर्म

सिद्धचक्र महामंडल विधान कर सिद्ध प्रभु के समान कर्मों से मुक्त होने की भावना भाते है विज्ञमति माताजी
एटा
परम पूजनीय सिद्धांतरत्न भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी के सानिध्य में सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन हो रहा है, सोमवार की बेला में महामंडल विधान के दूसरे दिन मंडल पर अर्ध समर्पित किए गए।

 

 

इस बेला में एटा नगर गौरव प्रज्ञा पद्मिनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने सिद्ध चक्र महामंडल विधान का महत्व एवं इसके विषय में बताया माताजी ने कहा कि हम सिद्ध चक्र महामंडल विधान कर सिद्ध प्रभु के समान कर्मों से मुक्त होने की भावना भाते है,

 

 

अष्टानिका महापर्व के बारे में भी बताया और कहा कि यह पर्व 1 वर्ष में तीन बार मनाया जाता है, अष्टमी से पूर्णिमा तक यह आठ दिवसीय पर्व परमात्मा की आराधना, सामायिक, ध्यान और विशेष रूप से स्वाध्याय करने का स्वर्णिम काल है।

माताजी ने कहा कि संयम, सामायिक, ध्यान, पूजन के कारण करोड़ इच्छाओं का अभाव होने से अपूर्व सुख और शांति की प्राप्ति होती है। सभी इस विधान में बैठकर सिद्ध प्रभु की आराधना कर महा पुण्य का बंध कर रहे हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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