हम कर्म क्षय के लिए कोई कार्य नहीं कर रहे हैं सुधासागर महाराज
करगुवा
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव108 श्री सुधासागर महाराज ने प्रवचन मे कहा हम दान कर रहे अमीर बनने के लिए,हम कर्म क्षय के लिए कोई कार्य नहीं कर रहे हैं हम मुनि की सेवा करते हैं उससे मजबूत शरीर मिलता है इसलिए सेवा में रहे,हम मजबूत अस्वस्थ निरोगी रहे इसलिए रोगी की सेवा कर रहे हैं।हम कोई न कारण से कार्य कर रहे हैं हम कर्म क्षय के लिए कोई कार्य नहीं कर रहे हैं।यदि कर्म क्षय के लिए नहीं किया वह सम्यकदृष्टि नहीं,
उन्होंने कहा जैन धर्म स्वाधीन बनाता है इसके लिए हम जितनी अनुकूल वस्तुएं झोडते चले जाए हम सुखी हो जायेंगें। स्वाधीन हो जायेंगे किस्मत दुनिया अनुकूल हो जाए ये एक कल्पना है।सबसे ज्यादा विनाश स्वयं की बदुआ मिलता है हम अपने आप से परेशान है।
उन्होने कहा अपनी जिंदगी,किस्मत को कभी नही कोसना, हमें कभी आत्महत्या करने की नहीं सोचना। हमें पुण्य से उबना है।हम पाप से उब रहे हैं पाप से घबराकर मंदीर आ रहे है।जब पुण्य ज्यादा हो जाये तब मंदिर आए, ओर धर्म करे जो स्वयं दुखी है उसे दुनिया मे कोई सुखी नही कर सकता है। और जो स्वयं सुखी है उसे कोई दुखी नही कर सकता हैं सोना कीचड़ में पड़ा रहता है लेकिन उसका मुल्य कम नही होता है। आत्मा कही पर भी है वह नरक स्वर्ग मे रहे लेकिन वह अपना स्वभाव आनंद स्वरूप को नहीं झोडता हैं। वह सम्यकदृष्टि है वह नरको मे भी अपने स्वरूप को नहीं भूलेगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
