जीवन मे परेशानी न हो इसलिए बुजुर्गो पर ध्यान दे आचार्य श्री विद्यासागर महाराज

धर्म

जीवन मे परेशानी न हो इसलिए बुजुर्गो पर ध्यान दे आचार्य श्री विद्यासागर महाराज

डोंगरगढ़

चंद्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ में बुधवार को आचार्य श्री विद्यासागर महाराज नेएक दृष्टान्त के माध्यम से कहां कि एक बहुत छोटा बालक रहता है जो अभी ना तो अच्छे से चल सकता है और ना ही स्पष्ट पूरा-पूरा बोल सकता है, उससे कुछ दूरी पर ही एक दिया जलता रहता है जिसे वह बार-बार देखता है और उसे पकड़ने का प्रयास करता रहता है, तभी उसकी मां वही बैठी थी कुछ काम कर रही थी उसकी नजर उसपर पड़ी तो उसने उस दिया को वहां से हटा दिया, ऐसा वह दो-तीन बार करती है। कुछ दिन पश्चात वह बालक अपनी मां से छुपकर उस दिये को
पकड़ लेता है फिर उसको जोरों का चटका लगता है और वह
जोर-जोर से रोने लगता है तभी उसकी मां वहां आ जाती है और
उसे डांटने लगती है कि इतने बार मना करने पर भी नहीं मानता हैले और पकड़ दिये को लग गयाना चटका। अब वह बालक कभीवीभी उस दिये को नहीं पकड़ेगा,क्योंकि उसको इसका अनुभव हो गया है कि इसे छूने से हाथ जल जाता है।

 

 

 

 

पूज्य श्री ने समझाया की लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अधिक परिश्रम आवश्यक है। उन्होंने आज की शिक्षा पर भी कटाक्ष किया उन्होने कहा आज के  विद्यार्थियों में अतिरिक्त विषय लेने का प्रचलन बढ़ रहा है जबकि उन्हें जो उनका मुख्य विषय है उस पर पहले अधिक ध्यान देने कि आवश्यकता है जिसके लिए उन्हेंअपने से ज्यादा अनुभवी से संपर्क कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त कर अपने लक्ष्य कि प्राप्ति के लिए अधिक परिश्रम आवश्यक  है। इस प्रकार जिनवाणी मां भी हमें कहती है कि पहले  जिनवाणी को पढो, ज्ञानार्जनकरो तदनुसार आचरण करो। बच्चे कि मां ने समझायापर वह बालक को समझ नहीं
आया पर जब उसको इसकाअनुभव हुआ तो वह इसे अब
जीवन पर्यन्त याद रखेगा और दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगा।
एक दिन वह बालक अपने बड़े भाई से कहता है कि देखो मेरी
तर्जनी उंगली दिया से जल गई,बड़ा भाई बोलता है कि देखो मेरातो दोनों हाथ जला था, बुजुर्गों कोकार्य का अनुभव अधिक होता है,इसलिए उनकी बातों को माननाचाहिए ताकि आगे आपको किसी प्रकार कि परेशानी ना हो

 

एक दिन एक लड़का आया और कहता है महाराज आप अपना
अनुभव बताए, हमने कहा हम अपना अनुभव आपको कैसे  बताए उन्होने कहा आज  के बच्चे नए-नएप्रश्न पूछते हैं, जवाब दें। आज भारत में शिक्षा पद्धति मेंपरिवर्तन लाया जा रहा है  जबकि इसके पहले लगभग 200-250सालों से अंग्रेजों की बनाई शिक्षा पद्धति इंडिया में चलाई जा रही थी और आज भारत में नई शिक्षापद्धति लाई जा रही है, जिसे बहुत पहले ला लिया जाना चाहिए था। उन्होंने शिक्षक के विषय में कहा की एक शिक्षक को विद्यार्थियों को पढ़ाने के पहले उस विषय का पूर्ण अध्ययन-शोध आदि करना आवश्यक है, क्योंकि आज के
बच्चे नए-नए प्रश्न पूछते हैं जिसका जवाब शिक्षक के पास यदि न  हो तो फिर उसे उस विषय में और अधिक पढ़ाई और शोध कि आवश्यकता होती है, विद्यार्थियों कि नई-नई जिज्ञासाओं से ही शिक्षक नए-नए शोध करता है जिससे उनका अनुभव बढ़ता है।किस बात का अनुभव सुनना चाहते हैं आपकी क्या योग्यता हैआदि, पहले अनुशरण करो तो अनुभव धीरे-धीरे आ जाएगा, ऐसे एक दिन में अनुभव को कैसे साझा किया जा सकता है।

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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