आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज का 18 वा आचार्य पदआरोहण दिवस उपाध्याय विकसंत सागर महाराज आदि 14 पीछी संघ सानिध्य में मनाया गया

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आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज का 18 वा आचार्य पदआरोहण दिवस उपाध्याय विकसंत सागर महाराज आदि 14 पीछी संघ सानिध्य में मनाया गया

झालरापाटन।

आचार्य  श्री 108विराग सागर महाराज के शिष्य आचार्य विशुद्ध सागर महाराज का 18 वा आचार्य पद आरोहण दिवस शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उपाध्याय विकसंत महाराज के 14 पीछी संघ के सानिध्य में मनाया गया।

 

 

उपाध्याय विकसंत सागर महाराज ने बताया कि आचार्य विराग सागर महाराज को आज ही के दिन 31 मार्च को गणाचार्य पद से सुशोभित किया गया था तथा 31 मार्च 2007 को आचार्य विराग सागर महाराज ने विशुद्ध सागर महाराज को आचार्य पद से विभूषित किया था। तब से लगाकर आज तक विशुद्ध सागर महाराज ने लगभग 65 दीक्षाएं प्रदान की है एवं 34 वर्ष के साधु जीवन में डेढ़ लाख किलोमीटर की पदयात्रा की है।

 

उन्होंने कई ग्रन्थो की विभिन्न भाषाओं में रचना की है। ऐसे महान तपस्वी विशुद्ध सागर महाराज का 18 वा आचार्य दिवस हम मनाने जा रहे हैं। मुनि साक्ष्य सागर महाराज ने कहा कि संसार का हर एक प्राणी कोई भी जीव जिस गति और स्थिति में है उसी में रहना चाहता है। उसने इसे ही संसार का सारा सुख मान रखा है और कितनी भी कठिनाई में जीने के बावजूद व मृत्यु नहीं चाहता है।

 

सभी प्राणी जीव जीवन चाहते हैं चाहे उनके शरीर के प्रत्येक रोम में एक से अधिक रोग हो रहा हो या वह सड रहा हो , मृत्यु निकट हो फिर भी यदि उससे पूछेंगे तो वह मरने की इच्छा नहीं रखता है और इस असार संसार में ही सुख को सच्चा सुख मन कर बैठा है। जबकि हमारे महापुरुष जैन समाज के 24 तीर्थंकर भूत भविष्य वर्तमान काल मे हुए अनेक चक्रवर्ती नारायण प्रति नारायण आदि राजा महाराजा हुए हैं जो बहुत संपदा के धनी थे उन्होंने भी इस संसार को असार समझकर मोक्ष मार्ग पर चलते हुए शरीर को अपना नहीं समझा, राग नहीं किया और मृत्यु पर विजय पाने के लिए उन्होने संयम का पद अपनाया।

 

संयम के पद पर चलकर समाधि मरण करने में ही अपना अपनी आत्मा का हित समझा। आज के इस युग में कोई भी संयम नहीं धारण करता है। इसीलिए संसारी प्राणी भव भव में भटकता रहता है बिना संयम धारण किए किसी का उद्धार नहीं होता है।

मुनि समत्व सागर महाराज ने बताया कि आज का व्यक्ति यह नहीं समझना चाहता है कि मेरी विपत्ति का क्या कारण है। उसको अपनी वास्तविक संपत्ति का ज्ञान है संयम रूपी संपत्ति को वह विपत्ति मानकर बेठा है और सांसारिक धन वैभव को अपनी संपत्ति मान कर बैठा है तो उसका कल्याण कैसे होगा।

 

कार्यक्रम में भोपाल, अलवर, पन्ना, सागर, विदिशा, रामगंजमंडी, झालावाड़, पिडावा, कड़ोदिया सहित विभिन्न स्थानों से आए श्रावकों ने भाग लिया। इस मौके पर दीप प्रज्वलन का लाभ उषा, समकित, मंजरी सोनी परिवार को प्राप्त हुआ। पाद प्रक्षालन का लाभ जिला नारकोटिक्स अधिकारी महेंद्र कुमार जैन, शास्त्र भेंट का सौभाग्य अशोक सौरभ रखब चंद कासलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ। आरती का लाभ समस्त नवयुवक कार्यकर्ता जयपुर ने प्राप्त किया। तीन माताजी एवं समस्त दीदियो को वस्त्र भेंट करने का सौभाग्य गिरधर कुमार संजय कुमार बड़जात्या परिवार को मिला। भैया जी को वस्त्र भेंट टी करने का अवसर राजकुमार जैन टिल्लू एवं कविम जैन एडवोकेटको मिला। बाहर से आए समस्त अतिथियों का सम्मान दिगंबर जैन समाज के श्रेष्टिगणों ने किया। मुकेश चेलावत ने आचार्य विराट सागर महाराज की जीवनी पर प्रकाश डाला। संगीतमय पूजन दीदी एवं राजकुमार जैन बैंक वाला तथा वेदांत सावला ने करवाई। थाल सजाकर भक्तिमय नृत्य के साथ पूजन चांदवाड, चेलावत, बड़जात्या,नौपडा परिवार, णमोकार महिला मंडल, केंद्रीय महिला परिषद, जागृति महिलामंडल, आदिनाथ महिला मंडल, शुभकामना परिवार, त्रिशला बालिका मंडल, जैन युवा ग्रुप, जैनम ग्रुप एवं सौरभ अमीषा कासलीवाल परिवार ने नृत्य भक्ति करते हुए पूजन की।

     संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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