आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज सानिध्य में आचार्य श्री शांति सागर महाराज के आचार्य पद शताब्दी कार्यक्रम को स्मृति बनाए रखने के लिए पक्षी घर का हुआ भूमि पूजन मनुष्य जीवन तभी सार्थक होगा जब आप अणुव्रत महाव्रत धारण करेंगे आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज

धर्म

आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज सानिध्य में आचार्य श्री शांति सागर महाराज के आचार्य पद शताब्दी कार्यक्रम को स्मृति बनाए रखने के लिए पक्षी घर का हुआ भूमि पूजन
मनुष्य जीवन तभी सार्थक होगा जब आप अणुव्रत महाव्रत धारण करेंगे आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
उदयपुर
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती 108 आचार्य श्री शांति सागर जी महामुनिराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य शिरोमणी जिनधर्म प्रभावक राष्ट्र गौरव 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज का संघ सहित सबीना से प्रातः प्रगति आश्रम के लिए बिहार हुआ। मुक्ताकाश समवशरण में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म सभा को संबोधित कर कहा कि श्री आदिनाथ भगवान से लेकर श्री चंद्रप्रभु भगवान तक धर्म का विच्छेद नहीं हुआ था ।आज संघ चंद्रप्रभु भगवान के समवशरण में विद्यमान है सबको बहुत आनंद आ रहा है, संघ भी आनंदित है मिंडा परिवार ने इसकी रचना की है इसके पूर्व मिंडा परिवार ने सम्मेद शिखरजी की रचना भी कराई है।

 

 

ब्रह्मचारी गजू भैय्या,राजेश पंचोलिया इंदौर अनुसार आचार्य श्री ने प्रवचन में आगे बताया कि मुक्ताकाश समवशरण की रचना अद्भुत रचना है । समवशरण की रचना तो अनेक मंदिरों में होती है किंतु यह विश्व का पहला समवशरण है जो खुले आकाश में बनाया गया है आज संघ ने आनंदित होकर 1008 श्री चंद्रप्रभु भगवान के दर्शन किए भगवान का अभिषेक देखा आप सब को भी यह मानसिकता बनाना चाहिए
कि हमें जन्म जन्म तक समवशरण में बैठकर भगवान का सानिध्य मिले और मनुष्य जीवन को संयम के मार्ग पर आगे बढ़ावे ।

 

मनुष्य जन्म दुर्लभ होता है समवशरण में मनुष्य का केवल एक ही कक्ष कोठा होता है आपको भगवान की दिव्य ध्वनि सुनकर मनन करना है भजन की पंक्तियां जैन कुल मे जन्मे ,अभिमान करो रे आपने जैन कुल के साथ तीर्थंकर जैन कुल में जन्म लिया है ।भगवान की वाणी जिनवाणी को सुन कर संयम मार्ग पर बढ़ने का पुरुषार्थ करना चाहिए मुक्ताकाश समवशरण का पंचकल्याणक हमारे गुरु भाई आचार्य श्री अभिनंदन सागर जी ने कराया है। जीवन की रचना कैसे की जाए जन्म से मृत्यु का नाम जीवन होता है मनुष्य जीवन तभी सार्थक होगा जब आप अणुव्रत महाव्रत धारण करेंगे।

 

 

 

 

 

श्री शांति नाथ भगवान जैन मंदिर सबीना से प्रातः संघ का विहार हुआ। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी के आगामी आचार्य पद शताब्दी कार्यक्रम की चिर स्थायी स्मृति के लिए दशा नागदा समाज ट्रस्ट द्वारा 40 फीट ऊंचाई के 5 फीट चौड़ाई के पक्षी घर के निर्माण हेतु भूमि पूजन शिलान्यास आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में हुआ।


श्री शांति लाल वेलावत अध्यक्ष सकल दिगम्बर जैन समाज के हजारों गुरुभक्तों ने चातुर्मास स्थापना हुमड भवन के लिए श्रीफल भेट कर निवेदन किया।प्रगति आश्रम में ग्रीष्म कालीन वाचना हेतु संघ का अल्प विश्राम होगा।इसके पूर्व सबीना श्री शांति नाथ दिगंबर जैन मंदिर प्रवचन में आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि श्री शांति नाथ भगवान 3 पद के धारी रहे।श्री शांति नाथ श्री कुंथुनाथ श्री अरहनाथ भगवान भी चक्रवती रहे। इनके राज्य संचालन से प्रजा में सुख और शांति थी।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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