_आचार्य श्री‌ प्रमुखसागर महाराज संघ का‌ धूबड़ी‌ में ऐतिहासिक भव्य मंगल प्रवेश। नगर वासियों में खुशी की लहर

धर्म

_आचार्य श्री‌ प्रमुखसागर महाराज संघ का‌ धूबड़ी‌ में ऐतिहासिक भव्य मंगल प्रवेश।
नगर वासियों में खुशी की लहर

धूबड़ी‌
_पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य 108 श्री पुष्पदंत सागर महाराज के प्रियाग्र शिष्य परम पूज्य आचार्य प्रमुख 108 श्री प्रमुख सागर‌ महाराज ससंघ का सम्मेद शिखर जी तीर्थ से उग्र विहार करते हुए असम की सीमा प्रवेश‌ करते हुए, धूबड़ी में‌ मंगल अगवानी हुई।

 

 

 

 

 

जब आचार्य श्री की संघ सहित नगर में प्रवेश हुआ तो वातावरण भक्ति से ओतप्रोत रहा समाज जन भक्तजन
गाजे बाजे के साथ बहुत ही हर्षोल्लास पूर्वक सैंकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में जयकारों की ध्वनी सुनाई पड़ रही थी। जैन धर्म की ध्वजा जयंत हो रही थी।

विवरण
आचार्य श्री के विषय में लिखा जाना शब्दों की सीमा को असीमित करता हैआचार्य श्री की तपस्या का प्रभाव सचमुच अलौकिक है। उनकी तपस्या का तेज इतना है कि। भक्तों का हजूम गुरुवर के दर्शन को लालायित सा रहता है। यह परिलक्षित करता है कि धरती पर फिर से‌ महावीर ने‌ जन्म लिया है।


आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज का मंगल आशीष कहें या अध्यात्म योगी आचार्य‌ प्रमुख सागर‌ जी‌ महाराज की तपस्या का प्रभाव‌, की असम सरकार द्वारा भी असम‌ सीमा में‌ प्रवेश‌ के‌ साथ ही ससंघ को राज्य‌ अतिथी के रूप में घोषित कर‌ दिया।_ यह सचमुच जिन शासन की अद्भुत प्रभावना है और यह जैन दर्शन के सिद्धांतों का अनुसरण हर कोई करना चाहता है।

 

इतनी भीषण गर्मी सर्दी वह अनेक परिषह को रहते हुए गुरुवर ने पद बिहार करते हुए सम्मेद शिखर तीर्थ से मंगल विहार किया। जहां हम हम गाड़ी आदि से चलने के बावजूद भी थकान महसूस करने लगते हैं। लेकिन गुरुवर इतना उग्र बिहार करने के बावजूद भी मुस्कान दिखाते हुए नजर आते हैं, थकान का कोई उनके मुख पर नजर नहीं आता।

_यह गुरुवर की तपस्या का ही प्रभाव है कि सम्मेद शिखर जी से‌ अब तक पद विहार कर दूरी निर्विघ्न पूरी की।_
इतना ही नहीं उनके पद विहार के मार्ग में‌ जगह जगह जैनेत्तर समाज ने‌ भी आचार्य श्री की आगवानी करते हुए नजर आए। उनके प्रति श्रद्धा भाव प्रकट करते हुए, भक्तिभाव को प्रकट किया।_
जब पूज्य गुरुदेव ने जैन धर्म के महत्व को जन जन तक पहुंचाने की अपने सोच के साथ धूबड़ी के चौराहे पर प्रवचन करने हुए अपनी बात रखी सरकार‌ व समाज सक्रियता दिखाते हुए नज़र आयी।

यह बहुत कम दिखाई पड़ता है कि सरकार द्वारा पूरा क्षेत्र seal कर दिया गया हो, तथा सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था के तहत वहां आचार्य श्री का शानदार मंगल प्रवचन हुआ। उस समय जब गुरुवर का प्रवचन हुआ। उसमें जैन एवं जैनेत्तर की हजारों की संख्या में उपस्थिति देखी गई। यही भक्तों की भीड़ भगवान महावीर के समय‌ की याद दिलाती है। या यूं कहें तो साक्षात महावीर का समोसरण का प्रतिरूप देखने को मिला हो।

मिली जानकारी अनुसार पूज्य आचार्य श्री का धूबड़ी से शीघ्र ही विहार होने की संभावना है। इनका 2023 का चातुर्मास कहां होगा, यह तो आचार्य श्री ही जानते हैं। और यह सब भविष्य के गर्भ में छिपा है। मगर संभावनाएं व्यक्त की जा रही है कि इनका वर्षायोग 2023 गुवाहाटी में‌ होगा। अगर ऐसा ही होता है तो यह गुवाहाटी समाज का असीम पुण्य का योग होगा।_
संतो के चरण और वर्षा योग का पुण्य किसी अमृत पुण्य से कम नहीं होता है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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