36 समाधि दिवस आचार्य संघ सानिध्य में श्रद्धा और भक्ति पूर्वक मनाया गया ।
12 वर्षो की सल्लेखना मात्र 4 माह में क्रमश पूर्ण की।आचार्य श्री ने केश लोचन किए
उदयपुर
आचार्य श्री धर्म सागर जी ने भक्ति आराधना को हृदय में विराजमान कर लिया था 12 वर्ष की सल्लेखना साधना को मात्र 4 महीने में क्रमशः पूर्ण किया।सन 1969 में दीक्षित शिष्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आचार्य धर्म सागर विधान में अज्ञात सल्लेखना साधना अध्य का उच्चारण करते हुए देशना दी।
आचार्य श्री धर्म सागर जी का गुणानुवाद करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि आचार्य श्री धर्म सागर जी सीकर में 1 माह से अधिक नहीं रुके 1 माह पुर्ण होने के पूर्व निकटवर्ती नगर के बाहर चले जाते थे वही रात्रि विश्राम कर अगले दिन का आहार वही लेकर पुनः सीकर में आते थे । इस प्रकार स्वास्थ्य कमजोर होने के बावजूद अपने नियमों के प्रति सजग रहे ।

आज आचार्य धर्म सागर विधान का आयोजन आचार्य श्री संघ सानिध्य में किया गया जिसमें उपवास के बावजूद आचार्य वर्धमान सागर जी ने सभी मंत्रों व अर्घो का उच्चारण किया ।और प्रत्येक के समय बीच-बीच में आचार्य श्री के गुणों को स्मरण कर समाज को अवगत कराया।

आचार्य श्री ने बताया कि आचार्य श्री दीक्षा के पूर्व गृहस्थ अवस्था में भी निस्पृह रहते थे। इंदौर में कपड़े की गठरी रख कर व्यापार किया मात्र केवल एक रुपए का मुनाफा होने पर व्यापार बंद कर वापस आ जाते थे। संघ के अन्य साधुओं ने भी अपनी भावांजली प्रकट की।

विधान का वाचन मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने किया। आज के विधान में केशव नगर,आयड, प्रेम नगर, न्यू केशव नगर विभिन्न सेक्टरों की समाज ने पूजन में भाग लिया। जब से आचार्य श्री का उदयपुर आगमन हुआ है प्रतिदिन अनेक नगरों की समाज चातुर्मास हेतु श्रीफल भेट कर निवेदन कर रही हैं आज केशरिया जी के सैकड़ों श्रावक श्राविकाओं ने पंच कल्याणक एवम् चातुर्मास हेतु श्रीफल भेट किया।
आज प्रातः आचार्य शिरोमणि वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने केश लोचन किया।
एक परिचय

आचार्य श्री धर्म सागर जी के 36 वे समाधि वर्ष वैशाख कृष्णा नवमी 14 अप्रैल पर जीवन परिचय
जन्म
गंभीरा राजस्थान में पौष शुक्ला पुर्णिमा 12 जनवरी सन1914 में 1008 श्री धर्म नाथ भगवान के केवल ज्ञान कल्याणक दिवस पर श्रीमती उमराव देवी श्री बख्तावर मल जी के पुत्र श्री चिरंजीलाल जी का प्राथमिक जीवन संघर्ष तथा निर्मोहता के साथ बिता।
सन्यास

30 वर्ष की उम्र मेंचैत्र कृष्णा 7 संवत 2000 को क्षुल्लक दीक्षा तथा तथा फुलेरा पंच कल्याणक में विक्रम संवत 2008 को ऐलक दीक्षा ली 38 वर्ष की उम्र में कार्तिक शुक्ला 14 संवत 2008 को आपने आचार्य श्री वीर सागर जी से फूलेरा चातुर्मास में मुनि दीक्षा ली। संयोग देखिए कि श्री धर्म नाथ भगवान के कल्याणक दिवस पर जन्मे आपका मुनि दीक्षा बाद नाम भी मुनि श्री धर्म सागर जी किया गया।

सन 1969 में आप द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी की समाधि के बाद 24 फरवरी 1969 को तृतीय पट्टाधीश बनाए गए। आचार्य बनने पर उसी दिन 11 भव्य जीवो को दीक्षा दी।साधु जीवन के 43 वर्षो में आपने 76 दीक्षा दी। जिसमे पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिघि आचार्यश्री वर्धमान सागर जी आर्यिका श्री शुभ मति माताजी सहित वर्तमान में 7 शिष्य एवम् शिष्या धर्म प्रभावना कर रहे हैं वर्ष 2023 में आपका 36वा समाधि वर्ष है। वैशाख कृष्ण नवमी 22 अप्रैल सन 1987 में आपकी समाधि 1008 श्री मुनिसुब्रत नाथ भगवान के केवल ज्ञान कल्याणक के दिन सीकर में हुई। ऐसी दिव्य आत्मा को कोटिश नमोस्तु
राजेश पंचोलियां वात्सलय भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
