आचार्य 108श्री वर्धमान सागर जी महाराज द्वारा किया गया यज्ञपवित संस्कार11 श्रावको ने किये रात्रि भोजन त्याग, जल छानकर पीने का नियम, कंद मूल एवं पंच उदम्बर क़े त्याग.
बांसवाड़ा। 
मुनिसुव्रत जिनालाय संतभवन, बाहुबली कॉलोनी मे विराजित आचार्य 108 श्री वर्धमान सागर जी महा मुनिराज ने 11 श्रावको को जनेऊ ग्रहण करवा कर आजीवन रात्रि भोजन नहीं करने,कंद मूल भक्षण नहीं करने एवं नित्य देव दर्शन क़े नियम दिए.आचार्य ने बताया की इन छोटे छोटे नियम से ही व्यक्ति मे संयम की भावना बलवती होती हैं ।इससे व्यक्ति को अपनी इच्छाओ को नियंत्रित करने की शक्ति मिलती हैं, एवं आत्म विश्वास मे भी वृद्धि होती हैं।



और मन मे किसी भी प्रकार की हीन भावना नहीं पैदा होती हैं.इससे पूर्ब मुनि 108 हितेन्द्र सागर जी द्वारा मुलनायक 1008 श्री नेमीनाथ भगवान पर वृहद शांतिधारा करवाई गयी जिसके पुण्यार्जक कन्हैया लाल सेठ, निखिल सेठ परिवार रहे.इसके पश्चात आचार्य ससंघ ने गौशाला जाकर गौ माता को ग्रास ग्रहण करवाया. इस अवसर पर समाज क़े सुरेश सिंघवी, कमल सारगिया, हेमन्त सेठ, धरनेन्द्र सेठ, कन्हैया लाल सेठ, पंकज वगैरिया, अशोक कोठिया,महावीर मोरिया, परेश नायक, शीतल प्रकाश, महेंद्र वोरा, राजेंद्र वोरा, पंकज
डागड़िया, निखिल सेठ, महिपाल सारगिया सहित बड़ी संख्या मे श्रद्धालू उपस्थित थे उल्लेखनीय हैं
की आचार्य वर्धमान सागर जी का संघ पिछले दो सप्ताह से बाहुबली कॉलोनी मे विराजमान हैं, जिनकी चर्या इस पंचम काल मे भी चतुर्थ काल जैसी हैं, पूरा संघ गैस चूल्हे पर बना भोजन ग्रहण नहीं करता हैं तथा उन्ही श्रावको क़े हाथ से भोजन ग्रहण करता हैं जिनके वाटिका, होटल आदि जगह पर भोजन का त्याग होता हैं, शुद्ध जल क़े नियम हो,साथ ही कंद मूल एवं रात्रि भोजन का त्याग हो। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
