इच्छाओं का निरोध ही सर्वश्रेष्ठ तप-मुनि श्री प्रणीत सागर महाराज 

धर्म

इच्छाओं का निरोध ही सर्वश्रेष्ठ तप-मुनि श्री प्रणीत सागर महाराज पर्युषण पर्व के उत्तम तप दिवस पर संघस्थ क्षुल्लक105 श्री विधेय सागर जी महाराज ने अपने केशलोंच किये

देवली ,धर्मनगरी देवली मे विवेकानंद कॉलोनी स्थित पार्श्वनाथ धर्मशाला में परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रणीत सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक 105 श्री विधेय सागर जी महाराज के सान्निध्य में चल रहे पर्युषण पर्व महामहोत्सव के अंतर्गत सप्तम दिवस पर “उत्तम तप धर्म” पर सम्बोधन देते हुए बताया की तप कहलाता है इच्छा का निरोध जब तक नहीं होगा इच्छा का निरोध तब तक नहीं होगा आत्म शोध! इसी के साथ दोपहर में हुए पंचपरमेष्ठी विधान की महिमा बताते हुए बताया की पंचपरमेष्ठी विधान में 17प्रकार की निषेधिकाए है उनके अंतर्गत जीवन का अंत होना ही पंचपरमेष्ठी विधान को साकार करता है, हम भावना भाए की 17प्रकार की निषेधिकाओ को प्राप्त कर सके!अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु – की आराधना, स्तुति, और उनके गुणों पर चिंतन करना, यह उन पाँचों की पूजा करने की प्रक्रिया या विधि है, जिसे नवकार मंत्र के माध्यम से किया जाता है, और यह धर्म में परम पद प्राप्त करने का एक मार्ग है। प्रातः काल मे 6.30 बजे सर्वप्रथम श्री जी की शांतिधारा एवं अभिषेक पूजन की गई! 

 

 

 

 

इसी के साथ प्रातः 9 बजे से 10 बजे तक प्रातःकालीन श्रुतशाला के विद्यार्थियों द्वारा तत्त्वार्थ-सूत्र के 10 अध्याय का वाचन किया गया ! वाचन के उपरांत मुनि श्री ने आज सप्तम अध्याय का विस्तार से अर्थ बताते हुए बताया की तत्त्वार्थसूत्र का सातवाँ अध्याय जैन धर्म की नैतिकता का केंद्र है और अणुव्रतों (छोटे व्रतों) से संबंधित है, जो पाँच पापों – हिंसा, झूठ, चोरी, ब्रह्मचर्य (कुशील), और परिग्रह (अतिरिक्त धन व संपत्ति) से विरति प्रदान करते हैं। यह अध्याय इन व्रतों के पालन की व्याख्या करता है, जिसमें अणुव्रती व्यक्ति की जिम्मेदारियाँ, जैसे पांचों पापों का एक देश त्यागना और श्रावक के लिए गुणव्रत व शिक्षाव्रत शामिल हैं।

 

 

 

 

मीडिया प्रभारी विकास जैन टोरडी ने बताया की प्रथम सत्र में भगवान की प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य महेंद्र,राहुल, दुंधरी वाले परिवार एवं द्वितीय शांतिधारा एवं मुनि श्री का पादप्रक्षालन, चित्रअनावरण, द्विपप्रज्वलन, एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य सौभाग्य महावीर लाइट वाले परिवार को प्राप्त हुआ!

 

 

इसी के साथ बताया की दोपहर के सत्र में पंच परमेष्ठि विधान” का आयोजन वाणीभूषण पंडित प्रवर श्री अंकित शास्त्री दमोह(MP) वाले सांखना राजस्थान एवम संगीतकार अवनीश जैन गुना के निर्देशन में हुआ! विधान पुण्यार्जन एवं सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य हेमराज-शोभित जैन घटियाली परिवार को प्राप्त हुआ! 

इसी के साथ मे रात्रि में सांस्कृतिक क्रार्यक्रम के अंतर्गत “सीता की अग्नि तपस्या” का मंचन चन्द्रपभु मन्दिर पाठशाला के बालकों द्वारा किया जाएगा!

         संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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