हमारा मन ही हमारे काबू में नहीं है तो दुनिया को कैसे काबू में कर सकते हो–सुधासागर महाराज

धर्म

हमारा मन ही हमारे काबू में नहीं है तो दुनिया को कैसे काबू में कर सकते हो–सुधासागर महाराज

महरौनी–

अनचाहा क्यों घटित होता है जो में सोचना नही चाहता,वह क्यों सोचता हूं पराया क्या मेरे बारे मे सोच रहा है।मेरा मन अनचाहा क्यों सोच रहा है हमारा मन हमारे काबू मे नही है अन चाहे विचार आते हैं हमारा मन ही हमारे काबू में नही फिर हम दुनिया को कैसे काबू में कर सकते है। दुनिया हमारे अहित के बारे में नही सोचें इसके बजाय हमारा मन जो हम सोचना चाहते है वह सोचे अर्थात हम सकारात्मक सोचे। हमे खाली नही बैठना कोई न कोई काम करते रहना। तराजू में सामान तोलते रहो,जिंदगी में हताश मत बेठो, आराम मत करो, बाप की कमाई से इनवेस्ट करो उससे जो कमाई हो उससे अपना घर चलाओं।
उक्त आश्य के उद्गारमुनिपुंगव श्रीसुधासागर महाराज ने यशोदय तीर्थ महरौनी ललितपुर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

हस्तिनापुर में बन रहा है नवीन दान तीर्थ
मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि आज यशोदय तीर्थ महरौनी में जिस तीर्थ को गुरु देव ने दान तीर्थ नाम दिया है ऐसे हस्तिनापुर को चतुर्थ कालीन नगरी से आज भी उसी नाम से जाना जा रहा है करोड़ों वर्ष पूर्व जिस भूमि पर प्रथम तीर्थकर को आहार देकर राजा श्रेयांस ने दान तीर्थ का प्रादुरभाव किया और आज भी उसी नाम से वह तीर्थ जाना जा रहा है।


तीर्थ कमेटी के दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर, हस्तिनापुर में निर्माणाधीन वात्सल्य तीर्थ (महामुनी विष्णुकुमार जिनालय) के लिए 108 मुनिपुंगम श्री सुधासागर जी महाराज से श्री दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्रकमेटी केपदाधिकारी परम गुरु भक्त श्री सुशील मोदी मोदी नगर के नेतृत्व में अध्यक्ष-जीवेन्द्र जैन ग़ाज़ियाबाद, महामंत्री – मुकेश जैन सर्राफ, मेरठ,कोषाध्यक्ष -राजेंद्र जैन (गैस वाले),मवाना, सुनील जी सर्राफ, प्रवीण जी सर्राफ, मुकेश जी सर्राफ अन्य भक्तों ने श्री फल भेंट किए।

 

 

 

 

 

नाम पूर्वजों ने दिया है हम उसे आगे बढ़ाये


उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हमें नाम दिया पहचान दी है इसको संभाल कर हमें अगली पीढ़ी के सुरक्षित हाथों में सौंप कर अपनी संस्कृति को सुरक्षित करना चाहिए पूर्वजों की कमाई से जो अपना परिवार घर चला रहे है वो एक दिन बर्बाद हो जायेंगे,पूर्वजों का जो है वो हमारा है यह भूल है पुर्वोजों की कमाई का भोग मत करों उससे नई कमाई करों पूजन करों,अभिषेक कर अपने जीवन को पवित्र वनाये, एक मंदिर बनाऊ मेरे पूर्वज महान है ये पूर्वजों की कमाई,मे भी महान बनूगा यह हमारी कमाई है,पूर्वजों की इज्ज़त से मत जीना पूर्वजों की कहानी से भोग मत करना,पूर्वजों की इज्जत से जीना,पूर्वजो की बुराई सुनकर अन्दर से बुरा लगे
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अतीत से हमारा कल्याण नहीं होगा
मुनि पुंगव ने कहा कि जैन तो हमे कर्मो ने बना दिया जैनी बनना है जैसे बाप की कमाई है बासी है उसे नही कमाना जैनी स्वयं की कमाई है स्वर्गो व भोगभूमि में नई कमाई नहीं है वो बासा खाते है वो पुराने पुण्य से भोग भोगते है अतीत में किये हुए पुण्य से हमारा कल्याण नहीं होगा.मोक्ष का दरवाजा नया कमाई करते है उन्हें प्राप्त मिलता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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