आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ की 21 मार्च की आहार चर्या लापस्या में होगी।
राजसमंद
वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी गुरुदेव का 30 साधुओं सहित राजस्थान की सुप्रसिद्ध झीलों की डीसी नगरी उदयपुर के लिए पैदल विहार चल रहा है।
ब्रह्मचारी गजू भैय्या परमीत जैन ने बताया 20 मार्च को 5,8 km विहार कर पोटला में आचार्य संघ की आहार चर्या पश्चात 5,6 km विहार कर कैलाश मेहता के फार्म हाउस में रात्रि विश्राम किया। दिनांक 21 मार्च की आहार चर्या राजकीय स्कूल लापस्या जिला राजसमंद में होगी।उदयपुर में 1 मई से 5 मई सर्व ऋतू विलास दिगंबर मंदिरतथा 21 मई से 25 मई तक सेक्टर 11 में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के निर्देशन एवम संघ सानिध्य में होगी ।
आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ पद विहार करते हुए लगभग डेढ़ से 2 माह में धर्म की गंगा बहाते हुए संघ ने नसीराबाद, विजयनगर बागौर गंगापुर होते हुए विहार किया और अब आगे धर्म की गंगा बहाते हुए विहार चल रहा है अब उदयपुर की दूरी 90 km से भी कम है ।सकल दिगंबर जैन समाज उदयपुर के सैकड़ों समाज जन पैदल विहार में चल रहे हैं।

73 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अभी तक 103 दीक्षा दी हैं आपका दीक्षित साधु जीवन 55 वर्षो का है।श्री श्रवण बेलगोला में वर्ष 1993,वर्ष 2006 तथा वर्ष 2018 का 12 वर्षीय महामस्तकाभिषेक आपके प्रमुख सानिध्य में तथा 24 वर्षो के बाद श्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र का महामस्तकाभिषेक आपके संघ सानिध्य निर्देशन में हुआ।आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के साथमुनि श्री चिन्मय सागर जी श्री हितेन्द्र सागर जी श्री प्रशंम सागर जी श्री प्रभव सागर जी श्री चिंतन सागर जी श्री मुक्ति सागर जी श्री प्रबुद्ध सागर जी मुनि श्री मुमुक्षु सागरजी ,आर्यिका श्री शुभमती जी आर्यिका श्री शीतलमति जीआ श्री चैत्य मति जी आ श्री वत्सल मति जी आ श्री विलोक मति जी आ श्री ज्योति मति जी आ श्री दिव्यांशु मति जी आ श्री पूर्णिमा मति जी आ श्री मुदित मति जी आ श्री विचक्षणमति जीआ श्री निर्मुक्त मति जी आ श्री विन्रम मति जी आ श्री दर्शना मति जी आ श्री देशना मति जी आ श्री महायशमती जी , आ श्री प्रणत मति आ श्री निर्मोह मति श्री पद्मयशमति आ श्री दिव्य यश मति, श्री क्षुल्लक श्री विशाल सागर क्षु श्री महोदय सागर क्षु श्री शांत मति कुल 31 साधु है
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार के गौरव पाटनी किशनगढ़ व राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्यश्री शांतिसागर की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीशवात्सल्य वारिघि आचार्यश्री वर्धमान सागर के चतुर्विद् संघ में अभी वर्तमान में आचार्यश्री, 8 मुनिराज , 19 आर्यिका माताजी, 2 क्षुल्लक एवं 1 क्षुल्लिका माताजी सहित 31 साधु है। 26 वर्षीय आर्यिका माताजी से लेकर 86 वर्षीय मुनिराज भी हैं।शांतिलाल वेलावत अध्यक्ष पंच कल्याणक प्रतिष्ठा समिति, पारस चितोड़ा राजेश अनुसार, माह अप्रैल के प्रथम सप्ताह में आचार्य श्री का उदयपुर प्रवेश महावीर जयंती के पूर्व संभावित है ।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
