परम पूज्य प्रज्ञाश्रमण आचार्य श्री चन्द्रगुप्त गुरुदेव के पावन चरणों में रविपुष्यामृतनक्षत्र के शुभ संयोग के पावन अवसर पर बाल ब्रह्मचारी अलका दीदी, बाल ब्रह्मचारी जनक दीदी, बाल ब्रह्मचारी कपिल भैया ने पूज्य गुरुदेव के श्री चरणों में श्रीफल समर्पित कर दीक्षा प्रदान करने हेतु भावपूर्ण निवेदन किया।

धर्म

परम पूज्य प्रज्ञाश्रमण आचार्य श्री चन्द्रगुप्त गुरुदेव के पावन चरणों में रविपुष्यामृतनक्षत्र के शुभ संयोग के पावन अवसर पर बाल ब्रह्मचारी अलका दीदी, बाल ब्रह्मचारी जनक दीदी, बाल ब्रह्मचारी कपिल भैया ने पूज्य गुरुदेव के श्री चरणों में श्रीफल समर्पित कर दीक्षा प्रदान करने हेतु भावपूर्ण निवेदन किया।
लासुर स्टेशन
परम् पूज्य भारत मेवाड गौरव, जगद्गुरु गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुंथुसागर गुरुदेव तथा परम पूज्य प्रज्ञायोगी आचार्य श्री गुप्तिनंदीजी गुरुदेव* के शुभ आशीर्वाद से लासुर स्टेशन, जिला औरंगाबाद महाराष्ट्र में वर्षायोगरत परम पूज्य प्रज्ञाश्रमण आचार्य श्री चन्द्रगुप्त गुरुदेव के पावन चरणों में *रविपुष्यामृत* नक्षत्र के शुभ संयोग के पावन अवसर पर
बाल ब्रह्मचारी अलका दीदी, बाल ब्रह्मचारी जनक दीदी, बाल ब्रह्मचारी कपिल भैया ने पूज्य गुरुदेव के श्री चरणों में श्रीफल समर्पित कर दीक्षा प्रदान करने हेतु भावपूर्ण निवेदन किया। साथ ही संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी नेहा दीदी ने भी गुरु चरणो में श्रीफल समर्पित कर छोटी सी उम्र में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया।

 

 

अलका दीदी विवरण
उल्लेखनीय है कि राजस्थान के वागड़ क्षेत्र के डुंगरपुर जिले के चितरी नगर* में जन्मी ब्र.अलका दीदी पूज्य आचार्य श्री की पूर्वावस्था की बड़ी बहन है जो कि बचपन से ही आध्यात्मिक भावो से परिपूर्ण होकर मात्र 19 बरस की आयु में ही आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत*ग्रहण कर पिछले *23 बरसो* से साधु भगवंतों की सेवा वैयावृति में निरंतर समर्पित है।एवम इनके पिता श्री राजेंद्र शाह ने भी सितंबर 2023 में अपने पूर्वावस्था के सुपुत्र पूज्य आचार्य श्री चंद्रगुप्त जी से मुनश्री श्रीचंद्राभनंदीजी के रुप में जैनेश्वरी दीक्षाधारण कर उत्कृष्ट समाधि मरण प्राप्त किया है।

एक विलक्षण सत्य
भूपेश जैन,चितरी ने बताया कि इसके साथ ही सबसे विलक्षण यह कि क्रमशः दो राजपूत(गुजरात ) एवम ब्राह्मण(राजस्थान) परिवारों में जन्म लेकर ब्र.जनक दीदी और ब्र. कपिल भैया ने भी अल्पायु से ही जिनधर्म के उपदेशों को आत्मसात* कर इस संयम मार्ग पर अग्रसर है। एवम तीनो त्यागीयो ने श्रीमद राजचंद्र जी आध्यात्मिक साधना केंद्र, कोबा आश्रम, गांधीनगर गुजरात में साधनारत रहकर अपनी अभुतपूर्व सेवाए दी है।

 

 

जहा के अधिष्ठाता महान आध्यात्मिक संत पूज्य प्रवर श्री आत्मानंद जी साहेबजी की निश्रा में रहकर अपनी वैराग्य भावना और साधना को और दृढ़ता प्रदान की। और इस मार्ग पर आगे बढ़ने में परम पूज्य वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनंदी जी गुरुदेव, प्रज्ञायोगी जैनाचार्य श्री गुप्तिनंदी जी गुरुदेव एवं परम पूज्य प्राकृताचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुदेव, आचार्य सुयाशगुप्त जी गुरुदेव, आर्यिका सुनिधिमति माताजी ससंघ का सदैव महती आर्शीवाद प्राप्त कर अपने सौभाग्य को सुवर्ण बनाया।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *