भक्ति बाह्य व श्रद्धा अंतरंग से होती है* मुनि प्रश्मानंद महाराज *धर्म जागृति संस्थान राजस्थान प्रान्त के तत्वावधान में हुआ पद्म प्रभु महाअर्चना कार्यक्रम*

धर्म

*भक्ति बाह्य व श्रद्धा अंतरंग से होती है* मुनि प्रश्मानंद महाराज
*धर्म जागृति संस्थान राजस्थान प्रान्त के तत्वावधान में हुआ पद्म प्रभु महाअर्चना कार्यक्रम*

पद्म पुरा (जयपुर)

 

 

अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान राजस्थान प्रांत के तत्वाधान में श्री 1008 पदम प्रभु भगवान अतिशय क्षेत्र बाड़ा पदमपुरा में 108 मंडलीय पदम प्रभु भगवान महा अर्चना एवं विधान का आयोजन परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी महामुनि राज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री ज्ञानानंद महाराज, संयमानंद महाराज, शिवानंद महाराज, प्रश्मानंद महाराज, श्रद्धानंद महाराज, पवित्रानंद महाराज, के ससंघ सानिध्य में पदम चंद जैन बीलाला प्रांतीय अध्यक्ष परिवार द्वारा ध्वजारोहण कर शुभारंभ किया गया।

 

 

 

 

बड़े भक्ति भाव व धूमधाम से आयोजन सम्पन्न हुआ तो वही इस अवसर पर मुनि श्री प्रश्मा नंद महाराज ने कहा कि भक्ति और श्रद्धा में अन्तर हुआ करता है भक्ति तो आप बाह्य रंग से नृत्य बाजो व नाना प्रकार से कर सकते हो किन्तु श्रद्धा अंतरंग से होती है जो आपकी थाली में सामग्री है वह आपकी श्रद्धा की परिचायक है जिसे बड़ी श्रद्धा पूर्वक,भाव सहित एक एक श्लोक पर अर्पित करना चाहिए।

           

 

 

 

 

इस अवसर पर धर्म जागृति संस्थान राजस्थान प्रांत के

पदाधिकारियों अनिल जैन पूर्व आई पी एस बसवा, सुनील पहाड़िया, पंकज लुहाड़िया,राजीव जैन,संजय जैन बड़जात्या, स्वागताध्यक्ष राजेश जैन रानू,हिमांशु जैन कामां व कार्यकर्ताओं द्वारा अतिथियों का सम्मान भी किया गया।
*संजय जैन बड़जात्या,राष्ट्रीय प्रचार मंत्री से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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