संसार में पुण्य और पाप दो की लीला है : आर्यिका सूत्रमति माताजी निवाई मे भगवान आदीनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव 16 मार्च को मनाया जाएगा
निवाई :
परम पूज्य आचार्य सुनील सागर महाराज की शिष्या आर्यिका सूत्रमति माताजी ने शनिवार को बरुणी गाँव में श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि जो आत्मा को पवित्र करें निर्मल बनाए वह पुण्य है और जो आत्मा का पतन करें दुर्गति मे ठोकरें दिलाये वह पाप है।
आर्यिका सूत्रमति माताजी शनिवार को सुबह गाँव बरुणी मे धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिससे सौभाग्य जगे, भाग्य फले, मन चिंतित कार्य सम्पूर्ण हो, पांचों इन्द्रियों की अनुकूलता मिल जाए, शरीर में आधि व्याधियां प्रवेश न करे, सारे संसार में इच्छित वस्तुएँ मिल जाए उसे पुण्य कहते हैं।

उन्होंने कहा कि जिससे अनुकूलता मिले वह पुण्य और जिससे प्रतिकूलता मिले वह पाप है। यघपि आध्यात्मिक दृष्टि से पुण्य पाप को आत्मा के उत्थान पतन मे सहायक नहीं माना क्योंकि ऐसा मान लेने पर आत्मा का अस्तित्व ही नहीं रह जाएगा।

आत्मा ज्ञान दर्शन स्वरूप है और पुण्य पाप अचेतन जड़ रुप है किन्तु संसारी प्राणी पुण्य और पाप के मध्य उलझकर अपना सर्वस्व कर्मो के उपर डाल देता है।
माताजी ने कहा कि संसार में पुण्य और पाप दो की लीला है। बुद्धि पूर्वक पाप न करना, न करने वालों को सहयोग देना तथा पुण्य कर्म के उदय मे असहायों, गरीबों, दीन दुखियों को नहीं सताना और धर्म तथा धेर्य को किसी भी परिस्थिति में नहीं छोड़ना। अनुकूलता प्रतिकूलता तो पुण्य पाप के आधीन है।

जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला ने बताया कि आर्यिका सूत्रमति माताजी संध सहित गांव बरुणी से मंगल विहार करके सोहेला पंहुचे जहाँ समाजसेवी बाबूलाल जैन पप्पूलाल जैन नवरत्न टोंग्या विमल सोगानी नरेश हथौना विमल जौंला डब्बू संधी पवन सोहेला राजेश जैन सोनू जैन आशा सिरस शशी सोगानी अर्चना टोंग्या ममता जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने पद प्रक्षालन करके अगवानी की।
जैन समाज निवाई के तत्वावधान में माताजी का संध टोंक सीमा में पहुंचा। शहर के सभी जैन मंदिरों में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदीनाथ का 16 मार्च को जन्म कल्याणक मनाया जाएगा जिसमें अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
