परम पूज्य मुनि श्री यशकीर्ति मुनिराज की आचार्य श्री देवनंदी गुरुदेव के मार्गदर्शन में हुई समाधि
णमोकार तीर्थ चांदवाड
प.पू. प्रज्ञाश्रमण निर्यापकाचार्य श्री देवनंदी जी गुरुदेव के संघस्थ मुनि श्री प.पू मुनि श्री 108. यशकीर्ति गुरुदेव सल्लेखना पूर्वक बुधवार की गोधूलि बेला में पूज्य गुरुदेव निर्यापकाचार्यत्व देवनंदी गुरुदेव के मार्गदर्शन में णमोकार तीर्थ पर हुई। णमोकार तीर्थ मांगीतुंगी सिद्ध क्षेत्र के निकट है।
एक पुण्य का संयोग कहा जाता है एक शिष्य की समाधि मुनि अवस्था में आचार्य भगवंत की निश्रा में संपन्न हो निश्चित रूप से जैन दर्शन में सल्लेखना समाधि का विशेष महत्व बताया गया है।पूज्य मुनि श्री की अंतिम यात्रा 2 मार्च 2023 को सुबह 8.30 बजे णमोकार तीर्थ पर संपन्न होगी। समस्त क्रियायें बाल ब्रह्मचारिणी वैशाली दीदी के मार्ग दर्शन में संपन्न होगी।
एक परिचय मुनि श्री यशकीर्ति जी महाराज

पूज्य मुनि श्री का जन्म 1 जनवरी 1975 को जबलपुर में हुआ। पूज्यश्री की लौकिक शिक्षा कक्षा दस तक रही। इनका ग्रहस्थ अवस्था का नाम आनंद जैन था, आप श्रीमती कमला बाई एवं श्रीमान संतोषजी की बगिया के अनमोल मोती थे।

इन्होंने संचार मोह माया से परे होकर संसार से विरक्त की ओर कदम बढ़ाते हुए 31 मार्च 1993 में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया। उसके बाद यह संयम पथ की ओर बढ़ते चले गए। आपकी क्षुल्लक दीक्षा आचार्य श्री देवनंदी गुरुदेव के कर कमलों से पावन तीर्थ कचनेर में संपन्न हुई।

धीरे-धीरे यह संयम पद की ओर बढ़ते हुए सर्वोत्कृष्ट पद मुनि अवस्था की ओर बढ़ते गए और 27 नवंबर 1996 को श्री सिद्ध क्षेत्र गजपंथा में आपकी मुनि दीक्षा आचार्य श्री प्रज्ञा श्रमण देवनंदी गुरुदेव के कर कमलों से संपन्न हुई। 27 वर्षों का मुनि पर जीवन त्याग और संयम से ओतप्रोत था। और 1 मार्च 2023 को आपकी सल्लेखना पूर्वक समाधि भी पूज्य आचार्य श्री की निश्रा में प्रभु स्मरण करते हुए हुई।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
