सम्मेदशिखर तीर्थ की वन्दना जो भाव सहित कर लेता है वह दुर्गति पात्र नही बनता प्रमाणसागर महाराज
पारसनाथ
श्री सम्मेद शिखरजी की जो भाव सहित वन्दना कर लेता है,वह निश्चित रूप से दुर्गति का पात्र नहीं बनता है। “एक बार वन्दे जो कोई ताके नरक पशुगति नहीं होई” ऐसा उल्लेख हमारे ग्रंथों में भी मिलता है, हम यह नहीं कहते कि जो सम्मेद शिखरजी की वन्दना कर लेगा वह मोक्ष ही जाऐगा, लेकिन इतना अवश्य कहता हूं कि वह दुर्गति का पात्र तो नहीं बनेगा।
उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने श्रीसम्मेदशिखर जी तीर्थ गुणायतन से व्यक्त किये। श्री अविनाश जैन विदिशा ने बताया
अपने उदबोधन में मुनि श्री ने आगे कहा कि तीर्थ हमारी संस्कृति के सबसे बड़े सम्वाहक तत्त्व हैं, धरोहर हैं, और इन तीर्थों से ही हमें सच्ची प्रेरणा मिलती है, मार्ग मिलता है, इसलिए तीर्थों का संरक्षण और सवर्धन तो प्रत्येक जिन भक्त का अपना दायित्व है।
तीर्थो पर अभी बहुत काम बाकी है
मुनि श्री ने कहा तीर्थों के विकास के लिए काफी कुछ काम हुए हैं, लेकिन अभी बहुत सारे काम की आवश्यकता है।विभिन्न क्षेत्रों की विभिन्न प्रकार की समस्याएँ हैं, और उनके विकास के लिए आवश्यक अलग-अलग कार्य भी है। उन्होंने कहा कि भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी काफी उत्साह के साथ क्षेत्रों के विकास में लगी हुई है, लेकिन अकेले कमेटी ही विकास नहीं कर सकती,जब तक समाज उसमें सहयोगी न बने। तीर्थ क्षेत्रों की सुरक्षा तभी हो सकती है लोगों में तीर्थयात्राओं के प्रति प्रवृत्तियाँ बढ़े।आप जिस किसी भी तीर्थक्षेत्र में जाये वहाँ की मूलभूत समस्याओं से रूबरू हों, और उनके लिए सलाह नहीं, सहयोग देना शुरू करें। तीर्थ क्षेत्रों की यात्रा के लिए जब, भी आप जाएँ अपना अधिकतम पैसा अपनी सुख सुविधाओं में खर्च करने की जगह, उसे बचाकर क्षेत्रों के विकास में अर्पित करें, तो आप तीर्थक्षेत्रों के संरक्षण में उनके विकास में काफी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मुनि श्री ने कहा कि बहुत से ऐसे लोग है जो तीर्थ यात्राएँ कराते है।
तीर्थयात्री बनाकर लेकर जाये बाराती नही
अपने प्रवचन में एक विषय पर औऱ जोर दिया कुछ लोग 100-500 का ग्रुप लेकर के यात्रा ले जाते है, और उसमें लाखों रुपया खर्च करते हैं, लौटने के बाद सब ने प्रशंसा भी की। मुनि श्री ने कहा कि आप तीर्थयात्राएँ कराइये, लेकिन उन्हें तीर्थयात्री बनाकर ले जाइये, बाराती बनाकर नहीं। इससे आपका पुण्योपार्जन नहीं होगा। हर तीर्थ क्षेत्र में जाओ वहाँ पूजन करो, विधान करो, वन्दना करो, एकासन करके आप अपनी यात्रा को सार्थक करो। संयम साधना का पालन करो, जिससे इस तीर्थ यात्रा के बाद तुम्हारे जीवन में एक बड़ा बदलाव घटित हो। जो पैसे का wastage (अपव्यय) करते है उसे हटाएँ, और हर तीर्थ क्षेत्र में जहाँ जरूरी है उसे वहाँ पर दें।
तुम तीर्थयात्रा कर रहे हो या मौज मस्ती?
उन्होंने कहा कि तीर्थ यात्रा का खान-पान सादा होना चाहिए, तुम तीर्थ यात्रा कर रहे हो या मौज मस्ती? खाने पीने मे ही सुबह से लेकर रात तक का समय निकाल देते हो, यह उचित नहीं। खुद भी दान दो, और आपके साथ जितने लोग जा रहे हैं उनको भी दान की प्रेरणा दो की तीर्थ क्षेत्र में हमको दान करना है। तीर्थ यात्रा करें।
तीर्थो की पवित्रता को कायम रखे
मुनि श्री ने आगे कहा तीर्थ यात्रा में जाकर फ़िजूल खर्ची न करें, तीर्थों में कहीं भी गंदगी न फैलाएँ। उसकी पवित्रता को कायम रखें। अगर ऐसा करते हैं तो हमारे सारे उपेक्षित तीर्थ क्षेत्र विकसित होंगे। अपने यात्रा के क्रम में प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्रों के साथ-साथ उन तीर्थ क्षेत्रों को भी अवश्य रखें जहाँ यात्रियों की आवाजाही कम है। जहाँ प्रसिद्धि है वहाँ तो लाइन लगती ही है। जहाँ कोई नहीं जाता, वहाँ आवाजाही कम होती है। तो हर तीर्थयात्री अपने हर यात्रा के क्रम में एक दो क्षेत्र ऐसे जरूर चुनें जो उपेक्षित हों। वहाँ के लिए समय निकालकर, विशेष ध्यान दें तो ये तीर्थों के विकास में, मेरी समझ में, अच्छी पहल होगी।
तीर्थराज सम्मेदशिखर वेटिंकन सिटी बनना चाहिए था,
सम्मेदशिखर तीर्थ के विषय मे बोलते हुए कहा, तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी का सवाल है, तो यह हमारा शिरोमणि तीर्थ है। मैंने कहा था कि ये एक तीर्थ है जिसे जैनियों का “vaticancity” (वैटिकन सिटी) बनना चाहिए था। दुर्भाग्य है कि हमारे पूर्वजों ने आपस में लड़ झगड़ कर अपनी शक्ति को बर्बाद कर दिया। सौ-दो वर्ष पहले ये पहल होती तो आज सम्मेद शिखर जी की छटा “वेटिकन सिटी” से बढ़कर ही होती, कमजोर नहीं होती। बहुत कुछ खो गया, लेकिन अभी भी बहुत कुछ बचा है। इसे अगर लोग चाहें तो बचा सकते हैं। पर्वत पर वन्दना में आने-जाने वाले लोगों की पूर्ण सहूलियत होनी चाहिए। पिछले दिनों हम लोगों ने कई घटनाएँ सुनी हैं। तीर्थक्षेत्रों में, धर्म स्थलों में भगदड़ मचने से कई लोगों को काल का ग्रास बनना पडा है। पहले से कुछ सोच कर के ऐसे जो स्थान है, जहाँ भगदड़ होने पर समस्याएँ हो सकती हैं, सरकार से मिलकर के वहाँ हमें दोनों तरफ के रास्ते बनाने चाहिए। ताकि किसी भी आपात स्थिति में बचा जा सकें। यात्रियों को चढ़ने उतरने में जो असुविधा होती है, आपने उस पर पूरा ध्यान भी दिया, और इन दिनों तीर्थक्षेत्र कमेटी ने बहुत अच्छा काम भी किया है। शीतलनाला से डाकबंगला तक जैसी सड़क है, शीतल नाला के नीचे की भी वैसी ही सड़क होनी चाहिए। ये प्रयास हो रहा है, और इसे शीघ्रता से करना चाहिए। पर्वत पर गंदगी न फैले इसके लिए जागरूकता का अभियान चलाना चाहिए। मुनि श्री ने कहा कि सभी यात्रियों से कहना चाहता हूँ कि सम्मेद शिखर पर ऊपर जाओ तो कोई भी कचरा फेंको मत। बल्कि उधर किसी ने फेंका है, तो उसे लेकर के अपने साथ आओ। इस तीर्थ क्षेत्र की पवित्रता को बनाये रखने में प्रत्येक जैनी की नैतिक ज़िम्मेदारी है। ये आपको वहाँ बनाकर रखना चाहिए। इस पूरे मधुबन को प्रदूषण मुक्त, भुखमरी मुक्त, बेकारी मुक्त, अशिक्षा मुक्त बस्ती बनाने का प्रयास करें। जब मैं यहाँ आया था तो मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैं कहाँ गया। आज सड़क बन गयी, बिजली आ गयी, पानी आ गया आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति हुई। अभी यहाँ बहुत -बहुत आवश्यकता है। यहाँ का इन्फ्रास्ट्रक्चर ठीक करने की जरूरत है, ताकि यहाँ आने वाले लोगों को लगे कि ये जैनियों का कोई महानतीर्थ है। मैं जब सम्मेद शिखर की यात्रा के लिए आ रहा था, तो मैंने सारनाथ देखा जो बौद्धों का कितना बड़ा सर्किट है, बौद्ध गया देखा वो कितना बड़ा सर्किट बना हुआ है। लेकिन हमारे सम्मेद शिखर का कोई हिसाब किताब नहीं। इसको डेवलप करना चाहिए,और संयोगतः अच्छी सरकार आयी है। लोगों की ऐसी धारणा है कि सरकार के माध्यम से काफी कुछ किया जा सकता है। देशभर की पूरी समाज को सामूहिक पहल करके इस क्षेत्र के विकास के लिए आगे आना चाहिए, ताकि यहाँ का विकास हो, यहाँ की जनता का विकास हो। पूरे मधुबन को, जो हमारे गुरूदेव ने कभी कहा था,
गुणायतन को वृन्दावन बनाना है यह एक सपना है
गुणायतन के सन्दर्भ मेंआचार्य गुरुवर ने आशीर्वाद देते हुए कहा है की, इसे वृन्दावन बनाना है। वो पहल आप सब को करनी है। वही एक सपना है। ताकि लोगों को स्वस्थ, शिक्षित, संस्कारीत, समृद्ध शाकाहारी बनाकर धर्म की स्थाई प्रभावना कर सके। ऐसा प्रयास करना चाहिए। लेकिन इस प्रयास के लिए यात्रियों को भी बहुत-बहुत सहयोग देने की आवश्यकता होगी।
यात्रियो में जागरूकता नहीं
अंत मे मुनि श्री ने कहा आज यात्रियों में जागरूकता नहीं है, क्षेत्र की पवित्रता को बनाये रखने की ज़िम्मेदारी आपकी है। आपको उन तमाम कृत्यों से बचना चाहिए जिससे हमारा क्षेत्र अपवित्र होगा।
(अविनाश जैन विदिशा) से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
