श्रद्धा आगे बढ़ती है तो विश्वास गहराता है समतासागर महाराज
केसली
पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री समता सागर महाराज ने श्रद्धा भक्ति के विषय पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि श्रद्धा आगे बढ़ती है तो विश्वास गहराता है और वही विश्वास समर्पण के रूप में सामने आता है, जो यात्रा श्रद्धा से प्रारंभ हुई थी वह यात्रा समर्पण के साथ समाप्त होती है। देव शास्त्र और गुरू के प्रति सच्ची श्रद्धा का नाम ही सम्यकदर्शन है।
निर्यापक मुनि समता सागर महाराज ने टड़ा केसली ग्राम में चल रहे तीन दिवसीय वेदीप्रतिष्ठा महोत्सव के समापन पर कहा कि धर्म की भावना से ही व्यक्ति के अंदर बुजुर्ग, माता पिता की सेवा करने का भाव आता है महाराज श्री ने निस्वार्थ भाव से दान करने की प्रेरणा देते हुए इसका महत्व समझाते हुए कहा कि निस्वार्थ भाव से यदि कोई दान आदि करता है तो उसका फल भी उसे तुरंत मिलने लगता है। इसके साथ ही आप जब भगवान आचार्य गुरुदेव, जैन धर्म, मुनि महाराज के गुणगान करते हैं तो उसका अतिशय भी तुरंत ही देखने को मिलता है। यह आपके ज्ञान और तप को बढ़ाता है।


पूज्यश्री ने धर्म कार्य में सहयोग करने को धर्म प्रभावना बताते हुए कहा कि धर्म के कार्य में सहयोग करना भी धर्म की प्रभावना है। जिनेन्द्र देव के साथ मुनिसंघ जब शहर में निकलते हैं तो उनके त्याग को देखकर हजारों की संख्या में लोग प्रभावित हो जाते हैं। और उनके अंदर से भी बीड़ी, सिगरेट, गुटका जैसे अभक्ष्य पदार्थों के त्याग की भावना अंदर से उत्पन्न होने लगती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
