आपके और आपके बच्चों के पुरुषार्थ में कोई कमी नहीं है,बस तन और मन का वास्तुशास्त्र सुधारने की आवश्यकता है विनम्रसागर महाराज
नौगांव
विश्व वंदनीय आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री विनम्र सागर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रातः कालीन ब्रह्म मुहूर्त बेला में स्वयं भी उठो और बच्चों को भी उठाओ, उन्होंने इस विषय पर
कहा कि जब आप स्वयं उठना शुरू कर देंगे तो बच्चे भी उठना शुरू कर देंगे। उन्होंने आईआईटी पीएमटी वह परीक्षाओं को देने वालों के लिए कहा कि जो भी बच्चे इन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियां कर रहे हैं और बच्चों को संधि काल में 2:30 से 3:00 से उठकर अपनी पढ़ाई शुरू करना चाहिए।
इस पर विशेष रूप से कहा कि यह समय कॉल विद्या अध्ययन के लिए श्रेष्ठ कहा गया है। जो भी बच्चे इस संधि काल में पढ़ाई करते हैं। वह थोड़े से परिश्रम से ही एक बार में सार्थक परिणाम सामने ले आते हैं। यह ऐसा समय है तब ना जाने कितनी आत्माएं सिद्धालय में जाने को आतुर रहती हैं। और उनकी पॉजिटिव उर्जा आपके लिए आशीर्वाद का काम करती है।
पूज्यश्री ने कहा कि यह बेला बीत जाने के बाद सुबह पो फटने वाली उषाकाल की विशेष व्याख्या में मुनि श्री ने कहा कि मंद मंद सुगंध पवन बह रहा है, बहना ही जीवन है। बहता बहता कहता रहा है लो यह संधि काल है ना, महक उठी सुगंधी है छोर छोर तक चारों ओर। सुबह होने के 24 मिनट के पहले और 24 मिनट बाद का समय संधिकाल कहलाता है। यह 48 मिनट का समय मनोहर काल रहता है इस समय किया गया अध्ययन जिंदगी की दिशा और दशा को बदलने की सामर्थ्य रखता है।


आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि आपके बच्चों के पुरुषार्थ में कोई कमी नहीं है बस तन और मन का वास्तु शास्त्र सुधारने की आवश्यकता है यदि यह सुधर गया तो देखना कि अगले 6 माह में ही सार्थक परिणाम सामने आ जाएंगे, फिर आपको अपने बच्चों के लिए किसी विशेष आशीर्वाद की आवश्यकता नहीं रहेगी। उन्होंने स्वस्थ रहने के भी उपाय बताएं और कहां की यदि आपका आहार, आचार और विचार सही दिशा में है तो तन से भी स्वस्थ रहेंगे, और मन से भी स्वस्थ रहेंगे। फिर आपको कहीं भटकने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
