अच्छा होता है हल्का होना – शरीर का, मन का, कर्ज के बोझ का.. *लेकिन वाणी, व्यवहार और सोच हल्की हो जाये तो…..??* अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज

धर्म

अच्छा होता है हल्का होना – शरीर का, मन का, कर्ज के बोझ का..
*लेकिन वाणी, व्यवहार और सोच हल्की हो जाये तो…..??* अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज

कुलचाराम हैदराबाद
अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपनी मंगलवाणी में कहा की अच्छा होता है हल्का होना – शरीर का, मन का, कर्ज के बोझ का..*
लेकिन वाणी, व्यवहार और सोच हल्की हो जाये तो…..??

 

उन्होंने कहा गणेश चतुर्थी*- सबके प्रमुख, घर के नायक या मुखिया। गणधर से गणेश बने गणपति महाराज। सबसे ज्यादा पूजने वाले, हर शुभ कार्य में आने वाले, सब मनोकामना पूर्ण करने वाले गणपति महाराज के हर एक अंग, हमें बहुत कुछ सीख देते हैं।

जैसे – बड़ा सिर* — बड़ी सोच को दर्शाता है।छोटा मुंह*- कम बोलो, काम का बोलो। *छोटी आँखे* — सूक्ष्म दृष्टी। *बड़े कान* — सुनो ज्यादा। (व्यर्थ की बातों को हवा में उड़ा दो)*लम्बी सूंड* — मिले मान सम्मान तो अहंकार मत करो। *बड़ा पेट* — सबकी परेशानियों को सुनकर, सबकी बातों को हजम कर लेना। *चरणों में लड्डू* — सबके साथ मीठा व्यवहार करो। *चरणों में चूहा*– घर के मुखिया की सब जगह पहुंच हो। इसलिए – हर घर, समाज, संघ, देश का मुखिया ही गणेश है। जो गणेश है, उसमें ये सारे गुण होना चाहिए।

 

 

जिस प्रकार चूहा घर के किसी भी जगह पहुंच सकता है, उसी प्रकार मुखिया की पहुंच सब जगह होनी चाहिए…!!!। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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