जब इंसान पैदा होता है तो जगत जश्न मनाता है इसीलिए मरने से पहले ऐसा काम करना चाहिए ताकि निधन पर दुनिया रोए निर्वेग सागर महाराज
चंपापुर
विश्व वंदनीय आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 प्रशांत सागर महाराज की सल्लेखना पूर्वक सोमवार की बेला में समाधि हुई। पूज्य मुनि श्री की समाधि ऐसे स्थल पर हुई है

जहां पर बासपुज्य भगवान के पांचो कल्याणक हुए हैं। ऐसी पावन भूमि पर पूज्य मुनि श्री की समाधि हुई। पूज्य मुनि श्री की अंतिम यात्रा दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र से निकाली गई मार्ग में णमोकार मंत्र का जाप करते हुए भक्त जय जय कार करते हुए चल रहे थे। पावन तीर्थ पर पूज्य मुनि श्री की देह पंचतत्व में विलीन हो गई। सभी समाज जनों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखें।
इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री निर्वेग सागर महाराज ने अपनी भावभीनी विनयाजली मुनि श्री के चरणो में व्यक्त करते हुए कहा कि जब इंसान पैदा होता है तो जगत जश्न मनाता है। इसीलिए मरने के पहले ऐसे काम करना चाहिए ताकि निधन पर दुनिया रोए।

उन्होंने कहा कि मौत कभी अंत नहीं है बल्कि नए कदमों की शुरुआत है। संसार में जो भी आता है वह जाता है। अपने

जीवन उच्चस्तर लक्ष्यों के लिए जीना चाहिए। भगवान बासपुज्य ने अहिंसा व अपरिग्रह का संदेश दिया है।

आपको दुख देने वाला नही है। बल्कि आपका दुख लेने वाला है सच्चा मित्र है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
