मन को संयमित करना बहुत कठिन है आचार्य कनकनंदी
भीलूडा
सिद्धांत चक्रवर्ती आचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में बताया कि मन को संयमित करना बहुत कठिन है। आत्मा में अनंत शक्ति हैं। अच्छी भावना से शक्ति का विस्फोट होता है। आत्मशक्ति को नष्ट करने वाले अनर्थ दंड हैं। साधु के सभी कार्य प्रयोजन भूत होते हैं। साधु आहार भी तप बढ़ाने के लिए लेते हैं। प्रमाद पूर्वक , दिखावा के लिए अप्रयोजन भूत कार्य नहीं करना चाहिए।
निंदा करना लड़ाई झगड़ा आदि अप्रयोजन भूत है। पेड़ एक जीव हैं, मार्बल के एक टुकड़े में असंख्यात जीव होते हैं। चक्रवर्ती का 1 दिन का भोजन बनाने में उनके रसोई को 359 दिन परिश्रम करना पड़ता हैं। चक्रवर्ती के भोजन बनाने वाले 360 रसोई होते हैं प्रतिदिन एक-एक रसोईया भोजन बनाता है। राम अपने भाई लक्ष्मण से कहते थे इनको हमने युद्ध ने मारा है परंतु यह हमारे शत्रु नहीं हैं। लक्ष्मण को भी रावण के पास उनकी अच्छाइयों को ग्रहण करने के लिए भेजते हैं। कृषि करना पाप कार्य नहीं है बड़े-बड़े आचार्य शांति सागर जी पाय सागर जी कुंथु सागर जी आदि अनेक आचार्य किसान थे। विज्ञान से बहुत आगे जैन धर्म हैं।
विजय लक्ष्मी जैन से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
