आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य राजधानी भोपाल में मुनि अनुत्तर सागर महाराज निरंतर कर रहे उपवास की साधना, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड में दर्ज हुआ नाम
भोपाल,
राजधानी भोपाल के शंकराचार्य नगर निवासी- जितेन्द्र जैन जो अब राष्ट्र संत आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के संघ में रहकर तप, त्याग, संयम की साधना कर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हैं। मुनिश्री अनुत्तर सागर महाराज निरन्तर उपवास की कठिन साधना कर रहे हैं। 8 नवंबर 2011 से 19 नवंबर 2022 तक 1415 दिन बिना अन्न, जल के निर्जल उपवास की कठिन साधना की। उल्लेखनीय है कि आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के संघ में रहकर महातीर्थ श्री सम्मेद शिखर जी सहित अनेक तीर्थ क्षेत्रों एवं अन्य जगहों पर चातुर्मास की साधना के दौरान यह उपवास किये और इसके लिये गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड में नाम दर्ज हुआ।
समाज के प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि मुनिश्री की गृहस्थ अवस्था का सम्पूर्ण परिवार धर्म के मार्ग पर लगा हुआ है।

गृहस्थ अवस्था के छोटे भाई अविनाश जैन प्रतिष्ठाचार्य के रूप में देश के अनेक शहरों में संतों के सानिध्य में धार्मिक अनुष्ठान करवा रहे हैं। मुनिश्री अनुत्तर सागर महाराज के गृहस्थ अवस्था के पिता जमुना प्रसाद सिंघई 88 वर्ष की आयु में आचार्य विद्या सागर महाराज के सानिध्य में समाधि मरण हुआ। माता लक्ष्मी जैन एवं उनकी दो गृहस्थ अवस्था की बहनें श्रीमती सुषमा एवं सुनीता भी प्रतिमा व्रत लेकर धर्म मार्ग की ओर अग्रसर हैं।


प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि 8 नवंबर 2011 को मुनि अनुत्तर सागर महाराज ने मंगलगिरि तीर्थ सागर में आचार्य विशुद्ध सागर महाराज से दीक्षा लेकर मोक्ष मार्ग की यात्रा प्रारंभ की।
संकलन
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
