निवाई में अशोक रोहिणी चारित्र प्राकृत महाकाव्य पर आधारित प्रतियोगिता के बेनर का हुआ विमोचन सुरक्षित बनने के लिए संगठन की परम आवश्यकता है। जैन मुनि समत्व सागर महाराज
निवाई –
जैन मुनि समत्व सागर महाराज एवं शील सागर महाराज संध के सानिध्य में गुरुवार को श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अग्रवाल मन्दिर में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली अशोक रोहिणी चारित्र पर बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के पोस्टर का समाज द्वारा विमोचन किया गया।
जैन धर्म प्रचारक विमल जौंला एवं सुनील भाणजा ने बताया कि आचार्य श्री वसुनंदी महाराज के पावन आशीर्वाद से उनके ही द्वारा रचित महाकाव्य अशोक रोहिणी चारित्र पर बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।
इस दौरान गुरुवार को अग्रवाल सेवा सदन प्रांगण में धर्म जाग्रति संस्थान राजस्थान के प्रांतीय अध्यक्ष श्रावक श्रेष्ठी पदमचंद जैन बिलाला एवं सोभागमल अजमेरा जयपुर एवं तहसील अध्यक्ष विमल जौंला के नेतृत्व में अशोक रोहिणी चारित्र पर बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता बेनर एवं पोस्टर का विमोचन किया गया जिसमें दिगम्बर जैन अग्रवाल समाज अध्यक्ष विष्णु बोहरा संरक्षक हुकमचंद जैन शंभु कठमाणा प्रेमचंद जैन मुकेश बनेठा अजय जैन नवरत्न टोंग्या महेन्द्र चंवरिया महावीर प्रसाद छाबड़ा संजय बड़ागांव मोहनलाल चंवरिया हितेश छाबड़ा महेन्द्र लावा पदमचंद सांवलिया निर्मल पांडया उपेन्द्र पाटनी नीरज माधोराजपुरा प्रेमचंद सोगानी सुरेन्द्र जैन चिराग टोंग्या शकुंतला छाबड़ा हेमा बनेठा शशी सोगानी सहित अनेक गणमान्य लोगों ने धर्म जाग्रति संस्थान राजस्थान के प्रांतीय पदाधिकारियों एवं अतिथियों का समाज द्वारा स्वागत करते हुए प्राकृत महाकाव्य पर आधारित प्रतियोगिता बेनर का विमोचन किया गया। राकेश संधी एवं हितेश छाबड़ा ने बताया कि इस दौरान समस्त संध को श्री फल एवं शास्त्र की प्रति समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता बेनर विमोचन के तहत प्रांतीय अध्यक्ष पदमचंद जैन बिलाला जयपुर ने तहसील अध्यक्ष पद की विमल जौंला को जिम्मेदारी सौंपी।
इस अवसर पर मुनि श्री समत्व सागर महाराज ने प्रतियोगिता के महत्व पर धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमें अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने बहुमुखी व्यक्तित्व का विकास करने एवं परिवार समाज राष्ट्र एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित बनने के लिए संगठन की परम आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस ब्रह्माण्ड का प्रत्येक प्रदेश प्रत्येक क्षेत्र प्रवाहित होती हुई सरितायें तथा लहराते वृक्ष हमें संगठन की, सम्मिलित की, एकता के सूत्र में बंधने की, प्रेम की और वात्सल्य की शिक्षा दे रहे हैं।

फिर भी हम निरन्तर विषमताओं के, विद्वेष के, पार्टी पालिटिक्स के, पंथ के और पक्षपात के घेरे में बंध कर मेत्री भावना का हनन कर रहे हैं। कार्यक्रम का मंगलाचरण मुनि शील सागर महाराज ने किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
