सच्ची श्रद्धा प्राप्त करने के लिए ज्ञान का होना जरूरी है सिद्धसागर महाराज
रामगंजमंडी
शहर के बाजार नं. 3 में स्थित जैन श्वेताम्बर मंदिर में विराजित जैन
संत सिद्ध सागर जी ने प्रवचन में कहा कि आज के जमाने में जिनवाणी को सुनने वाले बहुत कम लोग रह गये हैं।
सच्ची श्रृद्धा को प्राप्त करने के लिये ज्ञान का होना जरूरी, श्रद्धा हमेशा समझ आने बाद होती है। सच्ची श्रद्धा और विश्वास वह है जो इंसान के आचरण में आवे, मनुष्य भव हमेशा पुरुषार्थ से मिलता है। ओर पुण्य धार्मिक कार्यो के लिए किये गये पुरुषार्थ से बढ़ता है। धर्म करने से मोक्ष ओर संयम की प्राप्ति होती है। मोक्ष प्राप्त करने के लिये राग ओर द्वेष को त्यागना जरूरी बताया।जैन संत सिद्धसागर जी ने राग ओर द्वेष का मुख्य कारण अज्ञान को बताया- जहाँ कामना का त्याग होगा वहां सुख आयेगा।
:- संत के पास धन नही उपदेश होते हैं :-
उन्होंने कहा कि संत के पास धन नहीं होता संत के पास तो उपदेश होते है। जैन संत ने कहा कि हर रोज 108 नवकार मंत्र का जाप करना चाहिये अंत समय से नवकार मंत्र ही काम आता है। जो संत 108 बार नवकार का जाप नही करते उनका संत जीवन अधूरा रहता है। संत 24 घंटे भगवान की आज्ञा में रहते हैं। भगवान जिस पथ पर चले उस पथ पर चलना ही भगवान की आज्ञा कहलाती है
पाप कार्यों का कोई भागीदार नहीं बनता :-

संत सिद्ध सागर जी ने कहा की इंसान परिवार के लिये पाप कार्य करता है लेकिन उस पाप कार्यों का दंड भुगतने के लिये कोई भागीदार नही बनता इंसान को उसका किया हुआ दंड खुद भुगतना पड़ता है। इसलिये पुरुषार्थ से कमाया मनुष्य भव व्यर्थ मे नही गवाना चाहिये- ज्ञान और धर्म की शुरुआत प्रश्न पूछने से होती है। संत श्री ने लोगो से इच्छाओ पर नियंत्रण करने की नसीयत देते हुए कहा की इच्छाए इंसान को वफादार नहीं बनने देती।
संसार रूपी खाट के दो मुख्य पाये अग्नि और जल को बताया सच्चा श्रावक हमेशा परभव के बारे में चिन्तित रहता है और उसी अनुरुप आचरण करता है।
जैन श्वेताम्बर श्री संघ के अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि सोमवार को प्रवचन के बाद संभवतया दोनो संतो का कोटा की तरफ विहार होगा।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
